Iran US conflict Strait of Hormuz : अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की खुली चेतावनी, कहा- किसी भी दुस्साहस का दिया जाएगा 'कड़ा और जोरदार जवाब'

खबर सार :-
Iran US conflict Strait of Hormuz : अमेरिकी हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा। आईआरजीसी ने दी सीधी चेतावनी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरानी नियंत्रण रहेगा बरकरार। तेल और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई संकट गहराया, युद्धविराम पर मंडराए खतरे के बादल।
Iran US conflict Strait of Hormuz : अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की खुली चेतावनी, कहा- किसी भी दुस्साहस का दिया जाएगा 'कड़ा और जोरदार जवाब'
खबर विस्तार : -

तेहरान/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते पर एक बार फिर बारूद की गंध तेज हो गई है। अमेरिकी वायुसेना और नौसेना द्वारा दक्षिणी ईरान में किए गए ताबड़तोड़ हमलों के बाद तेहरान का गुस्सा भड़क उठा है। ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य शाखा, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने वाशिंगटन को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी जारी की है। ईरान ने साफ कर दिया है कि यदि उसकी सीमाओं या सामरिक हितों को निशाना बनाने का सिलसिला थमा नहीं, तो वह ऐसा पलटवार करेगा जिसे संभालना अमेरिका के लिए मुमकिन नहीं होगा। इस सैन्य टकराव ने खाड़ी क्षेत्र में पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे बेहद नाजुक युद्धविराम को पूरी तरह वेंटिलेटर पर ला दिया है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरानी नियंत्रण और सैन्य दावों की हकीकत

दुनिया के कुल तेल व्यापार के पांचवें हिस्से के गवाह रहने वाले जलडमरूमध्य में इस समय भारी तनाव है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की हालिया सैन्य कार्रवाई के जवाब में आईआरजीसी ने अपनी नौसैनिक श्रेष्ठता का प्रदर्शन करने की कोशिश की है। ईरानी नौसेना के आधिकारिक सूत्रों के हवाले से जारी एक बयान में दावा किया गया है कि पिछले चौबीस घंटों के भीतर कम से कम 25 वाणिज्यिक जहाज उनके मुस्तैद पहरे के बीच से पूरी तरह सुरक्षित गुजरे हैं। इन जहाजों में विशालकाय कच्चे तेल के टैंकर, विशाल कंटेनर पोत और अन्य व्यापारिक बेड़े शामिल थे। ईरान का कहना है कि इन सभी जहाजों ने अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत पहले ईरानी नौसेना से बाकायदा अनुमति ली थी, जिसके बाद ही उन्हें आगे बढ़ने का सुरक्षित रास्ता मुहैया कराया गया।

आईआरजीसी की आधिकारिक समाचार एजेंसी 'सेपा न्यूज' ने इस पूरे घटनाक्रम पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। एजेंसी के मुताबिक, ईरानी नौसेना इस जलमार्ग पर पूरी तरह से मुस्तैद है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरानी नियंत्रण को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि ईरान की जलसीमा के पास 'स्मार्ट और कड़ा नियंत्रण' लागू है। सेपा न्यूज ने अमेरिकी सैन्य अधिकारियों को आगाह करते हुए लिखा कि किसी भी तरह की 'हमलावर कार्रवाई' का अंजाम बेहद भयानक होगा और ईरान इसका 'कड़ा और जोरदार जवाब' देने के लिए अपनी मिसाइल प्रणालियों को अलर्ट मोड पर रख चुका है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड की बड़ी कार्रवाई और आत्मरक्षा का तर्क

इस पूरे विवाद की हालिया चिंगारी सोमवार को भड़की, जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों ने दक्षिणी ईरान के तटीय इलाकों में भारी बमबारी की। अमेरिकी सेना का दावा है कि उन्होंने उन खुफिया ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया है, जहां ईरान ने मिसाइल लॉन्च पैड्स बना रखे थे। इसके अलावा, समुद्र में गुपचुप तरीके से बारूदी सुरंगें (माइन्स) बिछाने की कोशिश कर रही ईरानी हथियारों से लैस नौकाओं पर भी सटीक हमले किए गए। वाशिंगटन का मानना है कि ईरान इस समुद्री रास्ते को ब्लॉक करने की साजिश रच रहा था, जिसे समय रहते विफल करना जरूरी था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने पेंटागन में पत्रकारों से बात करते हुए इस हमले को पूरी तरह जायज ठहराया। हॉकिन्स ने कहा, "अमेरिकी बलों ने दक्षिणी ईरान में जो भी कदम उठाए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत विशुद्ध रूप से आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई का हिस्सा हैं। हमारे सैनिकों और मित्र देशों के जहाजों को ईरानी अर्धसैनिक बलों से सीधा और तात्कालिक खतरा था, जिसे नजरअंदाज करना आत्मघाती साबित हो सकता था।" अमेरिकी प्रवक्ता ने यह भी जोड़ा कि उनका देश इस क्षेत्र में शांति का पक्षधर है, लेकिन सीज़फायर या युद्धविराम की आड़ में अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सेंट्रल कमांड स्थिति पर नजर रखे हुए है और संयम बरतने के साथ-साथ किसी भी खतरे को टालने के लिए पूरी तरह सक्षम है।

युद्धविराम पर मंडराता खतरा और वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें

यह सैन्य टकराव ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देश एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़े थे। बीते 8 अप्रैल से दोनों पक्षों के बीच एक अस्थाई युद्धविराम लागू हुआ था, जिसके बाद ओमान और अन्य मध्यस्थ देशों की मदद से पर्दे के पीछे शांति वार्ता चल रही थी। महीनों से जारी इस खूनी संघर्ष को खत्म करने के लिए एक व्यापक समझौते का मसौदा तैयार किया जा रहा था, लेकिन सोमवार की बमबारी ने डिप्लोमेसी की मेज को उलट कर रख दिया है। जानकारों का कहना है कि इस हमले के बाद अब समझौते की गुंजाइश न के बराबर बची है।

इस क्षेत्रीय तनाव का खामियाजा केवल इन दोनों देशों को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। लाल सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक फैली इस नौसैनिक रस्साकशी की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर टूट गई है। सबसे बड़ा झटका तेल और ऊर्जा सप्लाई चेन को लगा है। बीमा कंपनियों ने इस रूट से गुजरने वाले जहाजों का प्रीमियम कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे माल ढुलाई की लागत आसमान छू रही है। कई देशों में आवश्यक वस्तुओं की किल्लत होने लगी है, जिससे वैश्विक बाजार में मंदी का खतरा गहरा गया है।

नौसैनिक नाकेबंदी और जहाजों के बदलते रास्ते की ग्राउंड रिपोर्ट

फिलहाल समुद्र में वर्चस्व की एक खतरनाक जंग चल रही है। एक तरफ जहां ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरानी नियंत्रण का दावा करते हुए खाड़ी के पूरे ट्रैफिक को रेगुलेट करना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों के चारों तरफ एक अभेद्य नाकेबंदी कर रखी है। इस नाकेबंदी का सीधा असर ईरान के आर्थिक तंत्र पर पड़ रहा है, क्योंकि वह न तो अपना तेल आसानी से बेच पा रहा है और न ही जरूरी सामान का आयात कर पा रहा है।

सैकड़ों जहाजों को बदलना पड़ा अपना रूट

अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा पिछले हफ्ते जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस नौसैनिक नाकेबंदी और सुरक्षा खतरों के चलते कम से कम 100 से अधिक बड़े वाणिज्यिक जहाजों को अपना रूट बदलने पर मजबूर होना पड़ा है। इन जहाजों को अब अफ्रीका के चक्कर लगाकर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों का भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना ने शक के आधार पर चार संदिग्ध जहाजों को समुद्र के बीच ही रोककर उनकी सघन तलाशी भी ली है, जिसे ईरान ने अंतरराष्ट्रीय डकैती करार दिया है।

दरअसल, इस विवाद की जड़ें कुछ महीने पीछे जाती हैं। ईरान ने बीते 28 फरवरी को एक कड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए इस जलमार्ग पर अपनी पकड़ को अप्रत्याशित रूप से सख्त कर दिया था। तेहरान ने साफ घोषणा की थी कि वे तमाम जहाज जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इजरायल या अमेरिका से जुड़े हुए हैं, उन्हें इस रास्ते से गुजरने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जाएगी। ईरान का यह गुस्सा उस संयुक्त हवाई हमले के बाद भड़का था, जो अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरानी सैन्य ठिकानों पर किया था। इसी के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरानी नियंत्रण का यह दांव अमेरिका को सीधे चुनौती दे रहा है। जवाब में अमेरिका ने भी अपनी पूरी नौसैनिक ताकत झोंक दी है, जिससे आने वाले दिनों में किसी बड़े पूर्ण विकसित युद्ध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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