ग्रीनलैंड पर अमेरिकी टैरिफ धमकियों से यूरोप में हलचल, मैक्रों का सख्त संदेश-“एकजुट होकर देंगे जवाब”

खबर सार :-
ग्रीनलैंड पर अमेरिकी टैरिफ धमकियों ने यूरोप-अमेरिका संबंधों में नई खटास पैदा कर दी है। इमैनुएल मैक्रों का सख्त संदेश बताता है कि यूरोप अब किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है। संप्रभुता, सुरक्षा और एकजुटता के मुद्दे पर यूरोपीय देश साझा मोर्चा अपनाने के संकेत दे रहे हैं, जिससे वैश्विक राजनीति में नया संतुलन उभर सकता है।

ग्रीनलैंड पर अमेरिकी टैरिफ धमकियों से यूरोप में हलचल, मैक्रों का सख्त संदेश-“एकजुट होकर देंगे जवाब”
खबर विस्तार : -

US-Europe Tension: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ लगाने की धमकियों पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इन धमकियों को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताते हुए साफ कहा कि अगर अमेरिका ने इन्हें अमल में लाया, तो यूरोपीय देश एकजुट होकर और आपसी तालमेल के साथ जवाब देंगे। मैक्रों का यह बयान ऐसे समय आया है, जब आर्कटिक क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत और वैश्विक राजनीति में उसका स्थान तेजी से बढ़ रहा है।

संप्रभुता और स्वतंत्रता पर कोई समझौता नहीं

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने विस्तृत बयान में मैक्रों ने कहा कि फ्रांस यूरोप और दुनिया भर में देशों की संप्रभुता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है। यही मूल्य फ्रांस के सभी अंतरराष्ट्रीय फैसलों का आधार हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति फ्रांस की निष्ठा भी इन्हीं सिद्धांतों से जुड़ी है और इसी सोच के तहत फ्रांस यूक्रेन का समर्थन करता आया है और आगे भी करता रहेगा।

आर्कटिक सुरक्षा और ग्रीनलैंड का महत्व

मैक्रों ने ग्रीनलैंड में डेनमार्क की ओर से आयोजित सैन्य अभ्यास में फ्रांस की भागीदारी को भी सही ठहराया। उन्होंने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र और यूरोप की बाहरी सीमाओं की सुरक्षा दांव पर है। ग्रीनलैंड न केवल भौगोलिक रूप से अहम है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में भी इसकी भूमिका बढ़ रही है। इसी वजह से फ्रांस ने इस अभ्यास में भाग लेने का फैसला लिया और इसकी पूरी जिम्मेदारी भी ली।

“धमकियों से नहीं झुकेंगे”

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने दो टूक कहा कि किसी भी तरह की धमकी या दबाव फ्रांस और उसके सहयोगियों को प्रभावित नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बात सिर्फ यूक्रेन या ग्रीनलैंड तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के किसी भी हिस्से में यूरोपीय मूल्यों और सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।

टैरिफ धमकियों पर यूरोप का संभावित जवाब

मैक्रों ने अपने पोस्ट में दोहराया कि टैरिफ की धमकियां न केवल अस्वीकार्य हैं, बल्कि इस तरह की नीति का मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में कोई स्थान नहीं है। यदि अमेरिका ने वास्तव में टैरिफ लगाए, तो यूरोपीय देश सामूहिक रूप से जवाब देंगे। उनका कहना था कि यूरोपीय संप्रभुता की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी भावना के साथ वे अपने सभी यूरोपीय साझेदारों से बातचीत करेंगे।

ट्रंप की घोषणा से बढ़ा तनाव

मैक्रों की प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस घोषणा के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामानों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। जून की शुरुआत से इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की भी योजना है। यह कदम खास तौर पर ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी रुख से जुड़ा बताया जा रहा है।

ग्रीनलैंड: रणनीतिक द्वीप

ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और डेनमार्क साम्राज्य के अंतर्गत एक स्व-शासित क्षेत्र है। हालांकि रक्षा और विदेश नीति का नियंत्रण कोपेनहेगन के पास है। अमेरिका का यहां पहले से ही एक सैन्य अड्डा मौजूद है। साल 2025 में सत्ता में लौटने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप कई बार ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा जता चुके हैं, जिससे यूरोप और अमेरिका के रिश्तों में तनाव बढ़ता दिख रहा है।

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