Israel Iran War: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा से फोन पर बातचीत कर हालिया हमलों की कड़ी निंदा की और बहरीन की जनता के साथ एकजुटता व्यक्त की। बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत इस कठिन समय में बहरीन के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने बहरीन में रह रहे भारतीय समुदाय को दिए गए निरंतर समर्थन और सुरक्षा के लिए किंग हमद का आभार भी व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि भारत किसी भी प्रकार के हमले, विशेषकर नागरिक क्षेत्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कार्रवाई, का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है। भारत और बहरीन के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं, और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी समय के साथ और मजबूत हुई है। ऐसे में वर्तमान परिस्थिति में भारत का समर्थन बहरीन के लिए विशेष महत्व रखता है।
इससे पहले दिन में बहरीन डिफेंस फोर्स के जनरल कमांड ने जानकारी दी कि उसकी मिसाइल वायु रक्षा प्रणालियों ने देश को निशाना बनाकर किए गए हमलों को विफल कर दिया। आधिकारिक बयान के अनुसार, कुल 61 मिसाइलों और 34 मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) को सफलतापूर्वक मार गिराया गया। यह कार्रवाई देश की सुरक्षा व्यवस्था की तत्परता और तकनीकी क्षमता को दर्शाती है। बहरीन समाचार एजेंसी के हवाले से बताया गया कि सभी रक्षा प्रणालियां उच्च सतर्कता पर हैं और किसी भी संभावित खतरे का तत्काल और निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार हैं।
जनरल कमांड ने अपने वक्तव्य में कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे और निजी संपत्ति को निशाना बनाने के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों और यूएवी का उपयोग अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन है। विशेष रूप से ‘भेद’ (distinction) और ‘आनुपातिकता’ (proportionality) के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए किए गए ऐसे हमले न केवल गैरकानूनी हैं, बल्कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं। बयान में यह भी दोहराया गया कि बहरीन अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का वैध अधिकार रखता है।
सुरक्षा कारणों से बहरीन के नागरिकों से अपील की गई है कि वे अत्यधिक सावधानी बरतें, अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और केवल आधिकारिक एवं सत्यापित स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें। अफवाहों से बचने और हमले वाले स्थानों से दूर रहने का भी आग्रह किया गया है। प्रशासन ने आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखते हुए जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही है।
पश्चिम एशिया में बढ़ता यह तनाव व्यापक भू-राजनीतिक परिदृश्य से जुड़ा है। ताजा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों की खबरें आईं। इन हमलों का उद्देश्य कथित तौर पर तेहरान की मिसाइल क्षमताओं और सैन्य बुनियादी ढांचे को कमजोर करना बताया गया है। इसके बाद क्षेत्र में जवाबी कार्रवाइयों और तनाव में वृद्धि देखी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति पर शीघ्र नियंत्रण नहीं पाया गया, तो इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। ऐसे समय में भारत जैसे देशों की कूटनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, जो सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के माध्यम से समाधान खोजने की अपील करते रहे हैं।
भारत और बहरीन के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंध, विशेषकर ऊर्जा, व्यापार और प्रवासी भारतीय समुदाय के संदर्भ में, इस संकट के दौरान और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल न केवल कूटनीतिक समर्थन का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के पक्ष में दृढ़ता से खड़ा है।
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