Bangladesh minority violence: भारतीय मूल के अमेरिकी कांग्रेसमैन सुहास सुब्रमण्यम ने बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि मौजूदा यूनुस सरकार अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदुओं, की रक्षा के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है। उन्होंने इसे न केवल मानवाधिकार का मुद्दा बताया, बल्कि अमेरिका-बांग्लादेश संबंधों से भी जोड़ा।
वर्जीनिया से डेमोक्रेट सांसद सुहास सुब्रमण्यम के अनुसार बांग्लादेश में हो रही हिंसा किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही यह एक पैटर्न के रूप में सामने आई है। हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर लगातार हमले हो रहे हैं, जो यह दर्शाते हैं कि स्थिति गंभीर होती जा रही है।
सांसद ने बताया कि हिंसा के दौरान केवल लोग ही नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल, स्मारक, दुकानें और व्यवसाय भी निशाने पर हैं। उन्होंने कहा कि, “हमने हिंदू और अन्य धार्मिक स्मारकों को नुकसान पहुंचते देखा है। उनके व्यवसायों पर हमले हुए हैं और अब कई मामलों में आम लोगों की हत्या तक की घटनाएं सामने आई हैं।”उनके मुताबिक सत्ता परिवर्तन के समय तनाव होना सामान्य हो सकता है, लेकिन जिस तरह की लगातार हिंसा देखी जा रही है, वह अस्वीकार्य है।
सुहास सुब्रमण्यम ने कहा कि अमेरिकी दृष्टिकोण से यह जरूरी है कि बांग्लादेश जाने वाला कोई भी व्यक्ति अपनी जातीय पहचान, धर्म या पृष्ठभूमि के कारण असुरक्षित महसूस न करे। अमेरिका मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को अपनी विदेश नीति का अहम हिस्सा मानता है, ऐसे में बांग्लादेश की स्थिति चिंता का विषय बन जाती है।

सुब्रमण्यम ने यह भी बताया कि अमेरिका में रहने वाले बांग्लादेशी मूल के लोग, चाहे वे हिंदू हों या मुस्लिम, इस स्थिति से बेहद चिंतित हैं। कई लोगों के परिवार बांग्लादेश में रहते हैं और वे चाहते हैं कि अमेरिका इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाए। सांसद के अनुसार, उनके कई मतदाता लगातार उनसे संपर्क कर यह पूछ रहे हैं कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या किया जा सकता है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका बांग्लादेश पर दबाव बना सकता है, तो उन्होंने कहा कि इसके लिए दोनों प्रमुख अमेरिकी दलों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में ट्रंप प्रशासन के पास कूटनीतिक दबाव बनाने की अधिक शक्ति है। अमेरिका को नफरत और हिंसा से जुड़े अपराधों की खुलकर निंदा करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर कूटनीतिक विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए।
बांग्लादेश में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर भी सांसद ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव देखना चाहता है, जहां हर नागरिक की आवाज सुनी जाए। पिछले कुछ वर्षों में हुई घटनाओं को देखते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उनका मानना है कि किसी भी वैध रूप से चुनी गई सरकार को जनता की वास्तविक इच्छा का प्रतिनिधित्व करना चाहिए।
सुहास सुब्रमण्यम ने चेतावनी दी कि बांग्लादेश में बढ़ती अमेरिका-विरोधी भावना और लगातार हिंसा दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती है। बांग्लादेश दक्षिण एशिया में अमेरिका का एक अहम साझेदार है, खासकर क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग के मामलों में। ऐसे में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी रिश्तों में दरार डाल सकती है।
बांग्लादेश खुद को एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। संविधान में अल्पसंख्यकों को अधिकार दिए गए हैं, लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। खासकर चुनावी दौर में राजनीतिक हिंसा और धार्मिक असहिष्णुता की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और भी कमजोर हो जाती है।
अन्य प्रमुख खबरें
Trump की धमकी से दुनिया में हड़कंपः बोले- “आज रात खत्म हो सकती है एक सभ्यता”
UAE ने अपना कर्ज वापस मांगा तो बौखलाया पाकिस्तान, जानें 'अखंड भारत' का जिक्र कर क्या बोला पाक
US-Israel Iran War: अमेरिका-ईरान में अगले 48 घंटे में होगा सीजफायर ! युद्ध खत्म करने का अंतिम मौका
US-Iran War: खतरनाक ऑपरेशन चलाकर अमेरिका ने किया अपने पायलट का रेस्क्यू, ट्रंप ने दी पूरी जानकारी
Middle East Crisis: WHO ने बताया अब तक कितना हुआ नुकसान, इस बात पर दिया जोर
US Israel Iran War: टूटा अमेरिका का घमंड ! ईरान ने F-15 के बाद A-10 फाइटर जेट को भी मार गिराया
Middle East Crisis: पाकिस्तान का हाल बेहाल, विशेषज्ञ बोले और बढ़ेगा संकट