लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 'हर घर नल से जल' पहुंचाने के संकल्प में बाधा बनने वाले अधिकारियों के खिलाफ योगी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने कार्य में शिथिलता और लापरवाही बरतने के आरोप में बड़ी कार्रवाई करते हुए 26 इंजीनियरों और कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कदम उठाए हैं। इनमें से 12 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि कई अन्य के खिलाफ विभागीय जांच और तबादले के आदेश जारी किए गए हैं।
नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जल जीवन मिशन एक प्राथमिकता वाली परियोजना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया, तो भविष्य में बर्खास्तगी जैसी कठोर कार्रवाई से भी गुरेज नहीं किया जाएगा।
ग्रामीण जलापूर्ति विभाग द्वारा जारी सख्त आदेश के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात उच्च पदस्थ अभियंताओं पर गाज गिरी है। इस बड़ी कार्रवाई में लखीमपुर खीरी के अधिशासी अभियंता अविनाश गुप्ता, जौनपुर के अधिशासी अभियंता सौमित्र श्रीवास्तव, गाजीपुर के अधिशासी अभियंता मो. कासिम हाशमी और चंदौली के कार्यवाहक अधिशासी अभियंता अमित राजपूत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इनके साथ ही फील्ड स्तर पर काम की निगरानी में विफल रहे चंदौली के सहायक अभियंता सीताराम यादव और बिजनौर के सहायक अभियंता अकबर हसन के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की गई है।
शासन की यह सख्ती केवल उच्च अधिकारियों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि लापरवाही बरतने वाले जूनियर इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है। इसमें औरैया के जूनियर इंजीनियर अनुराग गोयल, हाथरस के कुलदीप कुमार सिंह, आजमगढ़ के राजेन्द्र कुमार यादव, बरेली के रूप चन्द्र और बाराबंकी के जूनियर इंजीनियर अवनीश प्रताप सिंह के नाम शामिल हैं। इसके अलावा कुशीनगर के कार्यवाहक खंडीय लेखाकार धर्मप्रकाश महेश्वरी को भी कर्तव्यों के प्रति उदासीनता बरतने के कारण सस्पेंड कर दिया गया है। विभाग के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी।
सिर्फ निलंबन ही नहीं, बल्कि विभाग ने अनुशासनहीनता और धीमी प्रगति को लेकर 4 इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक जांच (Disciplinary Inquiry) शुरू कर दी है। इसमें औरैया, मैनपुरी, प्रयागराज और शामली के अधिशासी अभियंता शामिल हैं। वहीं, गाजियाबाद, आगरा और मिर्जापुर के अधिशासी अभियंताओं को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर जवाब तलब किया गया है। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर इनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की संभावना है।
कार्यक्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विभाग ने 7 इंजीनियरों का स्थानांतरण भी किया है। प्रतापगढ़, रामपुर, बाराबंकी और शामली जैसे जनपदों में तैनात सहायक और जूनियर इंजीनियरों को नई जिम्मेदारियां सौंपते हुए अन्य जिलों में भेजा गया है, ताकि अटकी हुई परियोजनाओं को गति दी जा सके।
उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य साल के अंत तक ग्रामीण इलाकों में शत-प्रतिशत पाइपलाइन कवरेज सुनिश्चित करना है। हालिया कार्रवाई जल निगम के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। शासन के इस कदम से विभाग के अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं दूसरी ओर आम जनता के बीच सरकारी कार्यों की जवाबदेही को लेकर एक सकारात्मक संदेश गया है।
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