श्री गंगानगर: राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान को गति दी जा रही है। जिला कलेक्टर डॉ. अमित यादव के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता गतिविधियां चलाई जा रही हैं। सरकारी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से किशोरियों को टीकाकरण के महत्व के बारे में लगातार जानकारी दी जा रही है।
सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि अभिभावक इस अभियान में सहयोग करें और अपनी बेटियों को समय पर टीकाकरण के लिए प्रेरित करें। उन्होंने बताया कि जिले में 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को नजदीकी जिला अस्पताल, उपजिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क टीका लगाया जा रहा है। टीकाकरण के लिए आधार कार्ड, स्कूल आईडी या अंकतालिका में से किसी एक दस्तावेज को आयु प्रमाण के रूप में लाना आवश्यक है। जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं, उनके लिए अभिभावक की सहमति से आयु प्रमाणित कर यूविन पोर्टल पर अपलोड किया जा सकता है।
आरसीएचओ डॉ. मुकेश मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में विकसित होने वाला कैंसर है और इसके लगभग 99.7 प्रतिशत मामलों का कारण हाई-रिस्क एचपीवी संक्रमण होता है। उन्होंने बताया कि एचपीवी एक सामान्य वायरल संक्रमण है, लेकिन समय पर टीकाकरण से इससे बचाव संभव है। भारत में महिलाओं में यह दूसरा सबसे आम कैंसर है, इसलिए इसकी रोकथाम के लिए टीकाकरण बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग ने अभियान के सुचारू संचालन के लिए माइक्रोप्लान तैयार किया है, जो सभी स्वास्थ्य केंद्रों और विद्यालयों में उपलब्ध है। विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र में जाकर किशोरियों और उनके अभिभावकों से संपर्क कर रही हैं तथा टीकाकरण की तिथि, समय और स्थान की जानकारी दे रही हैं।
सीओआईईसी विनोद बिश्नोई ने बताया कि किशोरियां टीकाकरण के लिए खाली पेट न आएं और पहले नाश्ता कर लें। विद्यालय प्रबंधन को भी यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी बच्ची का टीकाकरण खाली पेट न किया जाए। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को इस अभियान से जोड़ें ताकि उन्हें भविष्य में गंभीर बीमारियों से बचाया जा सके।
जिला चिकित्सालय की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनामिका ने बताया कि भारत में हर वर्ष लगभग 1.23 लाख महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर से मृत्यु हो जाती है, जबकि करीब 77 हजार नए मामले सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन पिछले 20 वर्षों से दुनिया के 152 देशों में सुरक्षित और प्रभावी रूप से उपयोग में लाई जा रही है और इसके कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं हैं।
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