क्रोध करके आप दूसरे की गलती की सजा स्वयं को देते हैं: डॉ. कटारिया

खबर सार :-
श्री गंगानगर में तपोवन नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में डॉक्टर हरीश कटारिया ने लोगों से नशा छोड़े, गुस्सा छोड़ो पर एक व्याख्यान दिया। साथ ही उन्होंने नशे और गुस्से से होने वाली समस्याओं पर प्रकाश डाला।

क्रोध करके आप दूसरे की गलती की सजा स्वयं को देते हैं: डॉ. कटारिया
खबर विस्तार : -

श्रीगंगानगरः शहर के तपोवन नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में “नशा छोड़ो, गुस्सा छोड़ो” विषय पर एक प्रेरक व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लाइफ कोच एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. हरीश कटारिया ने नशे और क्रोध के दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उपस्थित रोगियों और श्रोताओं को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।

नशे से बचने के बताए प्रभावी उपाय

अपने उद्बोधन में डॉ. कटारिया ने कहा कि जीवन अत्यंत अनमोल और सुंदर है, जिसे ईश्वर और माता-पिता ने हमें एक अनमोल उपहार के रूप में दिया है। उन्होंने कहा कि इस सुंदर जीवन में नशे और गुस्से का कोई स्थान नहीं होना चाहिए, क्योंकि ये दोनों ही व्यक्ति और उसके परिवार के लिए विनाशकारी साबित होते हैं। उन्होंने बताया कि नशे की लत इंसान को मानसिक, शारीरिक और सामाजिक रूप से कमजोर बना देती है तथा परिवार और समाज में भी नकारात्मक प्रभाव डालती है।

डॉ. कटारिया ने नशे में लिप्त रोगियों को नशे के छह प्रमुख कारण और उससे बचने के छह प्रभावी उपाय भी बताए। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक सोच और अनुशासन अपनाए तो वह आसानी से नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रह सकता है। उन्होंने श्रोताओं को महान व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश देते हुए भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, संत स्वामी शिवानंद और महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग साझा किए।

उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास जीवन में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने उपस्थित लोगों को सुबह उठते समय और रात को सोने से पहले कुछ सकारात्मक “अफर्मेशन” दोहराने की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने श्रोताओं को इन सकारात्मक वाक्यों का अभ्यास भी करवाया, ताकि वे अपने जीवन में आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकें।

गुस्से से बढ़ता है मानसिक तनाव

गुस्से के विषय में बोलते हुए डॉ. कटारिया ने कहा कि जब व्यक्ति क्रोध करता है तो उसका सबसे पहला और सबसे अधिक दुष्प्रभाव उसी पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि गुस्सा करने से शरीर में कई प्रकार की बीमारियां जन्म ले सकती हैं और मानसिक तनाव भी बढ़ता है। इसलिए व्यक्ति को क्रोध पर नियंत्रण रखने की कला सीखनी चाहिए और शांत तथा सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने क्रोध पर नियंत्रण पाने के लिए कुछ सरल और व्यावहारिक उपाय भी बताए।

कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें रोगियों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए और नशा मुक्ति से जुड़ी समस्याओं पर सवाल पूछे। डॉ. कटारिया ने सभी प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्हें आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंत में संयोजक टी. एन. दत्ता ने डॉ. हरीश कटारिया का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उपस्थित रोगियों से अपील की कि वे डॉ. कटारिया द्वारा बताए गए जीवन सूत्रों को अपने जीवन में अपनाएं और नशा तथा क्रोध जैसी बुरी आदतों से दूर रहकर स्वस्थ और सकारात्मक जीवन की ओर आगे बढ़ें।

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