Kanji Ka Kund Shahpura : शाहपुरा की प्यास बुझाने वाला 200 साल पुराना 'कानजी का कुंड' अब खुद अपनी बूंद-बूंद को तरसा; प्रशासनिक अनदेखी से अस्तित्व पर संकट

खबर सार :-
Kanji Ka Kund Shahpura : शाहपुरा का 200 साल पुराना ऐतिहासिक 'कानजी का कुंड' प्रशासनिक अनदेखी और गंदगी के कारण विलुप्त होने की कगार पर है। जल संरक्षण के दावों के बीच इस प्राचीन धरोहर की बदहाली पर विशेष रिपोर्ट।

Kanji Ka Kund Shahpura : शाहपुरा की प्यास बुझाने वाला 200 साल पुराना 'कानजी का कुंड' अब खुद अपनी बूंद-बूंद को तरसा; प्रशासनिक अनदेखी से अस्तित्व पर संकट
खबर विस्तार : -

Kanji Ka Kund Shahpura : भीषण गर्मी के इस तपते दौर में जहाँ सरकारें और प्रशासन 'जल ही जीवन है' के नारों से दीवारें रंग रहे हैं, वहीं धरातल पर ऐतिहासिक धरोहरें दम तोड़ रही हैं। शाहपुरा से करीब 3 किलोमीटर दूर, ओदी और ढाणी के बीड़ के पास स्थित 'कानजी का कुंड' इसका जीवंत और दर्दनाक उदाहरण है। करीब दो शताब्दियों का इतिहास समेटे यह कुंड आज संरक्षण के अभाव में अपनी पहचान खोने की कगार पर खड़ा है।

Kanji Ka Kund Shahpura : अतीत की जीवनदायिनी, आज कचरे का ढेर

करीब 200 वर्ष पहले किसी उदार भामाशाह ने राहगीरों और पशुपालकों की सुविधा के लिए इस कुंड का निर्माण करवाया था। एक दौर था जब शाहपुरा से फुलिया कला के बीच पैदल, साइकिल या बैलगाड़ी से सफर करने वाले मुसाफिरों के लिए यह कुंड एकमात्र सहारा था। यहाँ का शीतल जल न केवल इंसानों की प्यास बुझाता था, बल्कि चरवाहों और खेतों में काम करने वाले मजदूरों के लिए भी यह एक वरदान से कम नहीं था। लेकिन आज विडंबना देखिए, जिसे जल संरक्षण का प्रतीक होना चाहिए था, वह नगर पालिका की लापरवाही के चलते 'डंपिंग यार्ड' में तब्दील होता जा रहा है।

Kanji Ka Kund Shahpura : स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना

कानजी का कुंड केवल एक जल स्रोत नहीं, बल्कि तत्कालीन स्थापत्य कला का एक बेहतरीन नमूना भी है। पत्थरों की मजबूत बनावट, कुंड की गहराई और पारंपरिक जल संचयन प्रणाली यह दर्शाती है कि हमारे पूर्वज जल प्रबंधन को लेकर कितने गंभीर और दूरदर्शी थे। आज की आधुनिक तकनीक के युग में भी इस कुंड की बनावट लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन इसकी जर्जर होती दीवारें प्रशासन के खोखले दावों की पोल खोल रही हैं।

Kanji Ka Kund Shahpura : कागजी दावों और धरातल की हकीकत में अंतर

राज्य सरकार 'मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान' के तहत करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है कि इस ऐतिहासिक कुंड को अब तक किसी योजना का हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया? क्या जल संरक्षण केवल भाषणों और विज्ञापनों तक ही सीमित है? वर्षों से सफाई न होने के कारण कुंड के चारों ओर गंदगी और झाड़ियों का साम्राज्य स्थापित हो गया है।

Kanji Ka Kund Shahpura : जनता की आवाज और सामाजिक पहल

प्रशासनिक उदासीनता के बीच 'जीव दया सेवा समिति' जैसी संस्थाएं उम्मीद की किरण जगाए हुए हैं। समिति के संयोजक अतू खां कायमखानी ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "यह कुंड शाहपुरा की विरासत है। यदि जल्द ही इसके जीर्णोद्धार पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इसे केवल तस्वीरों में देख पाएंगी।"

वहीं पूर्व पार्षद डॉ. मोहम्मद इशाक ने मांग की है कि इस कुंड को तत्काल मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान से जोड़कर इसका उद्धार किया जाना चाहिए। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाए, तो इस स्थान को न केवल जल संरक्षण के मॉडल के रूप में, बल्कि एक पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। फिलहाल, जो कुंड कभी दूसरों की प्यास बुझाता था, वह आज खुद अपने अस्तित्व को बचाने के लिए प्रशासन की ओर एक उम्मीद भरी नजर से देख रहा है।

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