आलोक सेंट्रल स्कूल में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई भगवान नरसिंह जयंती, सजीव झांकी ने मोहा मन

खबर सार :-
भीलवाड़ा के शाहपुरा में भगवान नरसिंह जयंती का पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर, स्कूल परिसर के भीतर एक जीवंत झाँकी सजाई गई, जिसमें भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह द्वारा दैत्यराज हिरण्यकशिपु के वध का चित्रण किया गया था।

आलोक सेंट्रल स्कूल में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई भगवान नरसिंह जयंती, सजीव झांकी ने मोहा मन
खबर विस्तार : -

शाहपुराः शहर के आलोक सेंट्रल स्कूल में भगवान नरसिंह जयंती का पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया।

निकाली गई सजीव झांकी

कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण भगवान विष्णु के चौथे अवतार नरसिंह भगवान द्वारा असुर राजा हिरण्यकशिपु के वध की सजीव झांकी रही। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के इस पावन अवसर पर जब विद्यार्थियों ने मंच पर नरसिंह अवतार का रूप धारण किया, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। रंग-बिरंगे परिधानों और आकर्षक साज-सज्जा के साथ प्रस्तुत की गई झांकी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

झांकी के माध्यम से यह दर्शाया गया कि किस प्रकार अहंकार में डूबे हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद की भगवान विष्णु के प्रति अटूट भक्ति को समाप्त करने के लिए अनेक प्रयास किए। उसने प्रह्लाद को कई बार मृत्यु के मुंह में धकेलने की कोशिश की, लेकिन हर बार भगवान ने अपने भक्त की रक्षा की। अंततः भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर संध्या समय महल की चौखट पर हिरण्यकशिपु का वध कर दिया।

विद्यालय के निदेशक वीरेंद्र व्यास ने इस प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि हिरण्यकशिपु को ऐसा वरदान प्राप्त था कि उसे न दिन में मारा जा सकता था, न रात में, न धरती पर, न आकाश में, न किसी मनुष्य द्वारा और न ही किसी पशु द्वारा। ऐसे में भगवान विष्णु ने आधे मनुष्य और आधे सिंह के रूप में अवतार लेकर संध्या समय चौखट पर अपनी गोद में बैठाकर अपने नाखूनों से उसका अंत किया। विद्यार्थियों ने इस पूरे प्रसंग को इतनी जीवंतता के साथ प्रस्तुत किया कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वास्तविक घटना सामने घटित हो रही हो।

कार्यक्रम के दौरान “सत्य की हमेशा जीत होती है” और “भगवान अपने भक्तों की रक्षा करते हैं” जैसे संदेशों ने सभी को गहराई से प्रभावित किया। विद्यार्थियों के उत्कृष्ट अभिनय, प्रभावशाली संवाद, सुंदर मंच सज्जा और सटीक ध्वनि प्रभावों ने कार्यक्रम को अत्यंत आकर्षक बना दिया।

छोटे-छोटे बच्चों ने भी प्रह्लाद, देवताओं और अन्य पात्रों की भूमिका निभाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं का भी विशेष योगदान रहा, जिनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने इस भव्य प्रस्तुति को सफल बनाया।

इस आयोजन में विद्यालय परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें दुर्गालाल धाकड़, दीपक लोहार, विष्णु खाती, फरजाना बानू, सुषमा सेन, मुकेश तेली, धीरेंद्र पांचाल, सुमन यादव, स्नेहा सेन, किरण जांगिड़, नैना पांचाल, राजेश सेन, महेश गुर्जर, आरती सान्नाढ़्य, देवकिशन कोली, गुड्डी बानू, दिव्या श्रीवास्तव, दीपक छिपा, पायल नायक, खुशबू राठौड़, चेष्ठा शर्मा, अंजनी शर्मा, दशरथ कुमावत सहित समस्त स्टाफ की गरिमामयी उपस्थिति रही।

अंत में विद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों को इस पर्व का महत्व समझाते हुए धर्म, सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि बच्चों में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति गर्व की भावना भी विकसित की।

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