शाहजहांपुर: कलेक्ट्रेट स्थित बिस्मिल सभागार में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने की। इस अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर में उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को नमन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत श्रद्धांजलि अर्पण के साथ हुई, जिसके बाद कलेक्ट्रेट कर्मचारियों द्वारा बाबा साहेब के जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों पर विभिन्न प्रस्तुतियां दी गईं। अपर जिलाधिकारी वित्त अरविंद कुमार ने डॉ. अंबेडकर के जन्म, शिक्षा और उनके संघर्षपूर्ण जीवन पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कठिन परिस्थितियों के बावजूद बाबा साहेब ने शिक्षा के बल पर समाज में अपनी पहचान बनाई और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष किया।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कोषाधिकारी ने कविता के माध्यम से बाबा साहेब के जीवन और विचारों को प्रस्तुत किया, जिससे उपस्थित लोग भावुक हो उठे। वहीं, विनाका मौर्य ने गीत के जरिए भारतीय संविधान के निर्माण और उसकी विशेषताओं को सरल शब्दों में समझाया। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बना दिया।
जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. अंबेडकर के जीवन, व्यक्तित्व और उनके बहुआयामी योगदानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं थे, बल्कि वे एक महान अर्थशास्त्री, समाज सुधारक और विचारक भी थे। उनके द्वारा किए गए शोध कार्यों का प्रभाव देश की आर्थिक नीतियों पर भी पड़ा। जिलाधिकारी ने बताया कि उनके विचारों ने भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने स्वयं स्वीकार किया है कि उन्हें अपने कार्यों में डॉ. अंबेडकर के शोध से प्रेरणा मिली। जिलाधिकारी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर द्वारा बनाए गए कानूनों और सामाजिक सुधारों ने देश में समानता, न्याय और अधिकारों की मजबूत नींव रखी, जो आज भी भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है।
जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर समाज में समरसता और समानता स्थापित करने के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के मूलमंत्र को अपने जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और इससे देश के समग्र विकास को गति मिलेगी।
कार्यक्रम में योगेश अग्रवाल सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने डॉ. अंबेडकर को संविधान के शिल्पकार और सामाजिक न्याय के महान प्रवर्तक के रूप में याद करते हुए कहा कि उनके आदर्श आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने बाबा साहेब के बताए मार्ग पर चलने और समाज में समानता, न्याय और बंधुत्व की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर कलेक्ट्रेट के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम सफल और प्रेरणादायक बन गया।
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