झारखंड में भूमि अभिलेखों का होगा डिजिटलीकरण, पंचायत स्तर पर लगाए जाएंगे ड्राइविंग लाइसेंस शिविर, सीएम ने दिए निर्देश

खबर सार :-
सीएम हेमंत सोरेन ने परिवहन विभाग और राजस्व, पंजीकरण और भूमि सुधार के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने जमीनों की खरीद को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटलीकरण पर जोर दिया।
झारखंड में भूमि अभिलेखों का होगा डिजिटलीकरण, पंचायत स्तर पर लगाए जाएंगे ड्राइविंग लाइसेंस शिविर, सीएम ने दिए निर्देश
खबर विस्तार : -

रांची: झारखंड में जमीन खरीदने या बेचने की सोच रहे लोगों को जल्द ही किसी खास जमीन के टुकड़े के स्टेटस के बारे में पूरी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल जाएगी। 

राज्य सरकार जमीन के रिकॉर्ड के बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण की दिशा में अपने प्रयासों को तेज करने जा रही है, जिससे नागरिक यह पता लगा सकेंगे कि कोई खास जमीन का टुकड़ा पहले ही किसी सरकारी प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित किया जा चुका है, या अभी अधिग्रहण की प्रक्रिया में है, या पूरी तरह से विवादों से मुक्त है। इस संबंध में जरूरी निर्देश सोमवार को हुई एक समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को दिए गए। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की, जिसमें परिवहन विभाग और राजस्व, पंजीकरण और भूमि सुधार विभाग के अधिकारी शामिल थे।

जमीन से जुड़े विवाद बने चुनौती

राज्य में जमीन से जुड़े विवाद लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहे हैं। कई मामलों में खरीदारों को जमीन खरीदने के बाद ही पता चलता है कि उन्होंने जो जमीन खरीदी है, वह किसी सरकारी योजना या चल रही अधिग्रहण प्रक्रिया में फंसी हुई है। एक बार प्रस्तावित डिजिटलीकरण प्रणाली लागू हो जाने के बाद लोगों को जमीन खरीदने से पहले ऑनलाइन उस जमीन के टुकड़े की ताजा स्थिति जांचने की सुविधा मिल जाएगी। इस पहल से जमीन विवादों और धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

खासमहल जमीनों से जुड़े मामलों की समीक्षा

बैठक के दौरान खासमहल जमीनों से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। सरकार ने पट्टे के नवीनीकरण, जमीन के हस्तांतरण और ज़मीन के उपयोग में बदलाव से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और उनमें पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से कदम उठाने का इरादा जाहिर किया। इस पहल के तहत, खासमहल जमीनों के पट्टेदारों की मैपिंग करने और उनके दस्तावेजों का दोबारा सत्यापन करने की योजना है।

पंचायत स्तर पर लगेंगे ड्राइविंग लाइसेंस शिविर 

परिवहन क्षेत्र में, ग्रामीण इलाकों के निवासियों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से, पंचायत स्तर पर ड्राइविंग लाइसेंस शिविर आयोजित करने पर जोर दिया गया। इस पहल से ग्रामीणों को अपना लाइसेंस प्राप्त करने के लिए जिला मुख्यालय या परिवहन कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की परेशानी से मुक्ति मिलने की उम्मीद है। बैठक के दौरान सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। 'गुड समैरिटन योजना' और 'हिट-एंड-रन मुआवजा योजना' की समीक्षा की गई।

ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं योजनाओं की जानकारी

अधिकारियों को इन योजनाओं के बारे में जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा, राज्य की प्रस्तावित 'गुरुजी आपातकालीन सेवा-1944' को तेजी से शुरू करने पर भी जोर दिया गया। सरकार का मानना ​​है कि यह सेवा आपातकालीन स्थितियों के दौरान लोगों को तत्काल सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण साबित होगी। बैठक के दौरान परिवहन व्यवस्था में सुधार, सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने तथा प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रशासनिक सेवाओं को अधिक पारदर्शी एवं सुलभ बनाने से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

 

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