पीलीभीत (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश पुलिस जहाँ एक ओर मित्र पुलिस का दावा करती है, वहीं पीलीभीत जिले के थाना सेहरामऊ उत्तरी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने खाकी की छवि पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। क्षेत्र के ग्राम मढ़ा खुर्द कलां (बिलवुक्षिया) निवासी एक युवक ने स्थानीय पुलिस पर न केवल सुनवाई न करने, बल्कि आरोपियों के साथ मिलकर जबरन समझौता कराने के लिए मारपीट और गाली-गलौज करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
घटना 8 मार्च 2026 की रात की है। पीड़ित पप्पू राठौर पुत्र लाल बिहारी के अनुसार, वह अपने घर में भोजन करने के बाद आराम कर रहा था। तभी गाँव के ही सोनू, गुड़िया और बादल उसके दरवाजे पर पहुँच गए और अकारण गाली-गलौज करने लगे। जब पप्पू ने विरोध किया, तो आरोपियों ने उसे घेर लिया और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में पप्पू का चेहरा बुरी तरह फट गया और सिर में गंभीर चोटें आईं। आरोप है कि हमलावरों ने उसकी जेब में रखे 270 रुपये भी लूट लिए और शोर मचने पर ग्रामीणों को आता देख जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए।
पीड़ित का कहना है कि उसने घटना की रात ही यूपी 112 को सूचना दी थी। अगले दिन 9 मार्च को वह अपनी लिखित तहरीर लेकर सेहरामऊ उत्तरी थाने पहुँचा। मेडिकल परीक्षण तो कराया गया, लेकिन पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की। पीड़ित पप्पू राठौर ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि 10 मार्च की शाम उसे जोगराजपुर बुलाया गया। वहाँ पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उसे आरोपियों के साथ राजीनामा करने के लिए मजबूर किया गया। जब उसने न्याय की मांग करते हुए समझौते से इनकार किया, तो आरोप है कि पुलिस ने उसके साथ अभद्रता की, मारपीट की और उसे ही झूठे मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दे डाली।
इस घटना के बाद सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली को लेकर आम जनता में काफी आक्रोश है। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि थाने में पीड़ितों की सुनवाई के बजाय 'सेटलमेंट' का खेल अधिक चलता है। आरोप लग रहे हैं कि क्षेत्र में भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि गरीब व्यक्ति को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल या उच्चाधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
पुलिस के कथित उत्पीड़न और पक्षपातपूर्ण रवैये से पूरी तरह आहत होकर पीड़ित पप्पू राठौर ने अब जनपद के पुलिस अधीक्षक का दरवाजा खटखटाया है। अपनी शिकायत में पीड़ित ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि हमलावर सोनू, गुड़िया और बादल के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि उसे सुरक्षा का अहसास हो सके। इसके साथ ही, उसने उन पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी उच्च स्तरीय जाँच कराने की मांग की है जिन्होंने थाने में उसे इंसाफ दिलाने के बजाय आरोपियों के साथ समझौते का अनुचित दबाव बनाया। पीड़ित का कहना है कि आरोपी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं और उसे जान का खतरा बना हुआ है, इसलिए उसे प्रशासन से सुरक्षा की भी दरकार है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने पीलीभीत पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली को गंभीर कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस के उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद पीड़ित को वास्तविक न्याय मिल पाता है या फिर यह मामला भी व्यवस्था की फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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