पीलीभीत: जनपद में कानून और न्याय व्यवस्था की सुगबुगाहट आज तेज रही, जब जिला एवं सत्र न्यायालय ने दो अलग-अलग गंभीर मामलों में अपना फैसला सुनाया। न्यायालय ने भ्रष्टाचार और हत्या जैसे संगीन आरोपों का सामना कर रहे मुख्य अभियुक्तों की याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। जिला जज के इस फैसले को अपराधियों के मनोबल पर कड़ा प्रहार माना जा रहा है।
पीलीभीत के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले ने पहले ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा रखा है। इस मामले के मुख्य आरोपी और निलंबित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम उर रहमान (इल्हाम शम्सी) ने गिरफ्तारी से बचने के लिए न्यायालय में अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी ने अपनी पत्नी अर्शी खातून के बैंक खाते का उपयोग सरकारी धन को ठिकाने लगाने के लिए किया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग 98 अलग-अलग लेनदेन (Transactions) के माध्यम से करीब 1.01 करोड़ रुपये की राशि निजी खाते में स्थानांतरित की गई। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह की विशेष रिपोर्ट और शासन की सक्रियता के बीच, जिला जज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इल्हाम की याचिका खारिज कर दी। फिलहाल, पुलिस की तीन विशेष टीमें आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
न्यायालय से दूसरा बड़ा झटका चर्चित अनिल हत्याकांड के मुख्य आरोपी वेद प्रकाश कश्यप को लगा है। 'मधुरवाणी इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड' के कार्यालय में अनिल कुमार का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला था। मृतक के परिजनों ने इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि सोची-समझी हत्या करार दिया था।
इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। पुलिस पर शुरुआत में धाराएं बदलने और ढिलाई बरतने के आरोप लगे थे, जिस पर अदालत ने भी पूर्व में तीखी टिप्पणी की थी। बचाव पक्ष ने आरोपी कॉलोनाइजर वेद प्रकाश कश्यप की नियमित जमानत (Regular Bail) के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया, लेकिन जिला जज ने अपराध की प्रकृति और साक्ष्यों के आधार पर उसे राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
पीलीभीत जिला न्यायालय के ये दोनों निर्णय समाज में यह कड़ा संदेश देते हैं कि चाहे मामला सफेदपोश भ्रष्टाचार का हो या किसी की जान लेने का जघन्य अपराध, कानून के हाथ हर गुनहगार तक पहुँचने के लिए पर्याप्त लंबे हैं। भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सरकारी खजाने में सेंध लगाने वालों के लिए अब कानूनी राहत पाना नामुमकिन होगा। वहीं, अनिल हत्याकांड में मुख्य आरोपी की जमानत याचिका खारिज होने से न केवल पीड़ित परिवार को न्याय की एक नई उम्मीद मिली है, बल्कि इससे पुलिस प्रशासन पर भी एक नैतिक दबाव बना है। न्यायालय के इस सख्त रुख के बाद अब जांच एजेंसियों को आरोपियों के खिलाफ ठोस पैरवी करने और फरार अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजने के लिए अपनी सक्रियता और अधिक बढ़ानी होगी। यह फैसला जिले की न्याय व्यवस्था पर आम जनता के भरोसे को और भी मजबूत करने वाला साबित होगा।
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