सीएम योगी के दौरे से पहले सपा जिलाध्यक्ष को हाउस अरेस्ट किए जाने का आरोप, बोले- लोकतंत्र की आवाज़ दबाने की कोशिश

खबर सार :-

सपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि जनता के अधिकारों और जनहित के मुद्दों की लड़ाई पहले भी जारी थी और आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि अन्याय, दमन और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के खिलाफ समाजवादी पार्टी का संघर्ष लगातार चलता रहेगा। सत्ता के दबाव से न तो पार्टी के कार्यकर्ता डरेंगे और न ही जनता की आवाज़ उठाने से पीछे हटेंगे।
सीएम योगी के दौरे से पहले सपा जिलाध्यक्ष को हाउस अरेस्ट किए जाने का आरोप, बोले- लोकतंत्र की आवाज़ दबाने की कोशिश

खबर विस्तार : -

पीलीभीत: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित दौरे से पहले समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह 'जग्गा' ने पुलिस पर उन्हें हाउस अरेस्ट किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि विपक्ष की आवाज़ को दबाने के लिए प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है।

लोकतंत्र को दबाने का आरोप

जगदेव सिंह 'जग्गा' का आरोप है कि सोमवार तड़के करीब चार बजे से पुलिस ने उन्हें उनके आवास पर ही रोक दिया और बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी। उनके अनुसार, यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी को विरोध दर्ज कराने और जनता के मुद्दे उठाने से रोकने के उद्देश्य से की गई।

सपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की जिम्मेदारी सरकार के सामने जनता की समस्याओं को उठाना और जनहित के मुद्दों पर आवाज़ बुलंद करना है। यदि विपक्षी नेताओं को उनके घरों में ही सीमित कर दिया जाए, तो यह लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल कर विपक्ष की राजनीतिक गतिविधियों को बाधित करने का प्रयास कर रही है।

पुलिस प्रशासन से नहीं आई कोई प्रतिक्रिया

उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता किसानों की बदहाली, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, बिजली संकट, जर्जर सड़कों और कानून-व्यवस्था जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। समाजवादी पार्टी लगातार इन मुद्दों को जनता के बीच उठाती रही है और आगे भी उठाती रहेगी।

जगदेव सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का इस प्रकार हनन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज़ को दबाकर जनसमस्याओं को खत्म नहीं किया जा सकता।

हालांकि, इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि प्रशासन की ओर से कोई बयान जारी किया जाता है, तो उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।

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