3600 किमी की नर्मदा परिक्रमा पूर्ण कर लौटे जगदीश शर्मा, शहर में हुआ भव्य स्वागत

खबर सार :-
जगदीश शर्मा 3,600 किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा पूरी करने के बाद लौट आए हैं। इस दौरान जंगलों, तपस्या और जिन आध्यात्मिक अनुभवों से वे गुज़रे, उन्होंने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। शाहपुरा में उनका भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक बार नर्मदा परिक्रमा अवश्य करें।

3600 किमी की नर्मदा परिक्रमा पूर्ण कर लौटे जगदीश शर्मा, शहर में हुआ भव्य स्वागत
खबर विस्तार : -

भीलवाड़ाः नर्मदा नदी की 3600 किलोमीटर लंबी और आध्यात्मिक रहस्यों से भरी परिक्रमा पूर्ण कर लौटे शिवपुरी के जगदीश शर्मा का शहर में भव्य स्वागत किया गया। उनके नगर आगमन पर डाक बंगला परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जैसे ही वे पहुंचे, लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया और “नर्मदे हर” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

इस अवसर पर सामाजिक संगठनों, अनुयायियों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें साफा बंधवाकर, शॉल व उपरणा ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनसे आशीर्वाद भी लिया और उनके तप, त्याग एवं साधना की सराहना की।

अभिनंदन समारोह का आयोजन एडवोकेट दीपक पारीक, सुनील सुखवाल, सुधीर झंवर और विक्रांत के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का संचालन गीतकार सत्येंद्र मंडेला ने किया, जिन्होंने काव्य पाठ के माध्यम से कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने अपनी रचनाओं में जगदीश शर्मा की कठिन तपस्या और नर्मदा परिक्रमा के आध्यात्मिक महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

जगदीश शर्मा ने बताया कि यह उनकी तीसरी नर्मदा परिक्रमा थी, जिसे उन्होंने लगभग 67 दिनों में पूरा किया। उन्होंने अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस दौरान उन्हें घने जंगलों, सुनसान रास्तों और सीमित संसाधनों के बीच कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कई बार ऐसे हालात बने जब वे रास्ता भटकने की स्थिति में पहुंच गए, लेकिन “नर्मदे हर” के स्मरण से उन्हें सही मार्ग मिलता गया।

उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों के लोगों द्वारा मिले सहयोग को नर्मदा मैया की कृपा बताया। उनका कहना था कि यह परिक्रमा केवल एक भौतिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और साधना का एक गहन माध्यम है, जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

नर्मदा परिक्रमा के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने नर्मदा पुराण का उल्लेख किया और कहा कि नर्मदा के दर्शन मात्र से पुण्य की प्राप्ति होती है, जबकि परिक्रमा करने से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति होती है।

उन्होंने बताया कि परिक्रमा के अंतिम चरण में ओंकारेश्वर पहुंचकर जल अर्पण, परिक्रमा और कन्या पूजन किया गया। इसी के साथ अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर यात्रा का समापन हुआ।

कार्यक्रम में कदमा महोदव ट्रस्ट के रतनलाल झंवर, गोविंद सिंह राणावत, शिव झंवर, संचिना कला संस्थान के अध्यक्ष रामप्रसाद पारीक, नगर भाजपा अध्यक्ष पंकज सुगंधी, गीतकार सत्येंद्र मंडेला, सुरेश मूंदड़ा, सुनील सुखवाल, पीयूष गदिया, घनश्याम सिंह राणावत, बजरंगसिंह राणावत, डाबला चांदा के अजय प्रताप सिंह राणावत, सुधीर झंवर, सत्यकाम जोशी, प्रेस क्लब के मूलचंद पेसवानी, सूर्यप्रकाश आर्य, गणेश सुगंधी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

समारोह के दौरान लगातार “नर्मदे हर” के जयघोष गूंजते रहे, जिसने पूरे आयोजन को भक्तिमय और ऊर्जा से भर दिया। यह आयोजन न केवल एक साधक के सम्मान का प्रतीक था, बल्कि नर्मदा परिक्रमा की महान परंपरा और उसके आध्यात्मिक महत्व को भी उजागर करता है।
 

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