संपत्ति नामांतरण हुआ सस्ता, लागू हुई नई शुल्क व्यवस्था

खबर सार :-
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, जमीन, मकान या अन्य अचल संपत्ति खरीदने के बाद उसका नामांतरण कराना अनिवार्य होता है। हालांकि अधिक शुल्क के कारण कई लोग इस प्रक्रिया को टालते रहे हैं। शासन द्वारा लागू की गई संशोधित नियमावली का उद्देश्य आमजन को राहत देना और नामांतरण प्रक्रिया को सरल बनाना है।
संपत्ति नामांतरण हुआ सस्ता, लागू हुई नई शुल्क व्यवस्था
खबर विस्तार : -

झांसीः नगर निगम झांसी ने संपत्ति नामांतरण (म्यूटेशन) शुल्क की नई दरें 1 जून से लागू कर दी हैं। शासन के आदेश, कार्यकारिणी की स्वीकृति और नगर निगम सदन की मंजूरी मिलने के बाद यह व्यवस्था प्रभावी हुई है। नई दरों के लागू होने से अब लोगों को संपत्ति का नामांतरण कराने के लिए पहले की तुलना में काफी कम शुल्क देना होगा।

अब तक नगर निगम संपत्ति की कुल कीमत का एक प्रतिशत नामांतरण शुल्क वसूलता था, जिसके कारण अधिक मूल्य की संपत्तियों के नामांतरण में लोगों को बड़ी रकम चुकानी पड़ती थी। नई व्यवस्था के तहत शुल्क को निर्धारित श्रेणियों में बांट दिया गया है। इसके अनुसार पांच लाख रुपये तक की संपत्ति पर एक हजार रुपये, पांच से दस लाख रुपये तक की संपत्ति पर दो हजार रुपये, दस से पंद्रह लाख रुपये तक की संपत्ति पर तीन हजार रुपये, पंद्रह से पचास लाख रुपये तक की संपत्ति पर पांच हजार रुपये तथा पचास लाख रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति पर अधिकतम दस हजार रुपये नामांतरण शुल्क निर्धारित किया गया है।

नई दरों को लागू करने से पहले नगर निगम ने कार्यकारिणी और सदन की स्वीकृति प्राप्त की थी। इसके बाद एक माह तक आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए, लेकिन निर्धारित अवधि में कोई भी आपत्ति प्राप्त नहीं हुई। इसके चलते 1 जून से नई दरों को लागू कर दिया गया।

नई व्यवस्था से जहां संपत्ति मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं नगर निगम की आय में कमी आने की संभावना है। नगर निगम को नामांतरण शुल्क से प्रतिवर्ष लगभग चार करोड़ रुपये की आय होती थी, लेकिन नई दरें लागू होने के बाद यह आय घटकर करीब 15 से 20 लाख रुपये तक रहने का अनुमान है। बताया जाता है कि महानगर में हर वर्ष लगभग 400 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का नामांतरण होता है।

इस संबंध में मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अवधेश कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशों और सदन की मंजूरी के बाद संशोधित दरों को लेकर आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। एक माह की अवधि में कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होने पर 1 जून से नई शुल्क व्यवस्था लागू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से आम नागरिकों को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा, हालांकि नगर निगम की आय पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

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