साइबर क्राइम के बारे में जागरूक करने के लिए सेमिनार का हुआ आयोजन

खबर सार :-
महिला कांस्टेबलों के लिए एक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान, झाँसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति ने उपस्थित प्रशिक्षुओं को साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप, उनसे बचाव के उपायों और आम जनता के बीच साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने की रणनीतियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

साइबर क्राइम के बारे में जागरूक करने के लिए सेमिनार का हुआ आयोजन
खबर विस्तार : -

झांसीः 16 मार्च को पंडित दीन दयाल उपाध्याय सभागार, झांसी में झांसी पुलिस द्वारा एक विशेष साइबर अपराध जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षियों को बढ़ते साइबर अपराधों के बारे में जागरूक करना और उन्हें इससे बचाव के उपायों के बारे में जानकारी देना था। कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति ने शिरकत की और महिला आरक्षियों को साइबर अपराधों से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

साइबर सुरक्षा के बारे में दी पूरी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि वर्तमान समय में साइबर अपराधों का दायरा बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को तकनीकी जानकारी के साथ-साथ सामान्य जनता को जागरूक करना भी अत्यंत जरूरी है। उन्होंने महिला आरक्षियों को सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग करने, ऑनलाइन ठगी से बचने, संदिग्ध लिंक और कॉल से सतर्क रहने और साइबर अपराध की स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने के बारे में बताया। उनका मानना था कि साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारी पुलिसकर्मियों और आम जनता दोनों के लिए जरूरी है, ताकि अपराधों पर काबू पाया जा सके।

साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे ने दी प्रस्तुति

कार्यक्रम में प्रसिद्ध साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे ने भी अपनी प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने साइबर अपराधों के विभिन्न प्रकार, ऑनलाइन ठगी के तरीकों और इससे बचने के व्यावहारिक उपायों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने फर्जी लिंक और कॉल से कैसे बचा जा सकता है और साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल सूचना देने के बारे में जानकारी साझा की।

कार्यक्रम में अरीबा नोमान (सहायक पुलिस अधीक्षक), लक्ष्मीकांत गौतम (क्षेत्राधिकारी नगर) और पीयूष पाण्डेय (क्षेत्राधिकारी साइबर) सहित अन्य पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। इस जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य महिला आरक्षियों को साइबर अपराधों के प्रति अधिक सजग बनाना और उन्हें प्रशिक्षित करना था, ताकि वे अपनी सुरक्षा के साथ-साथ आम लोगों को भी इस विषय पर जागरूक कर सकें।

यह पहल न केवल पुलिस कर्मियों की दक्षता को बढ़ाने के लिए थी, बल्कि आम जनता में भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए थी।

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