भीलवाड़ाः राजस्थान के भीलवाड़ा जिले स्थित जोगणियां माता शक्तिपीठ एक बार फिर सामाजिक समरसता, परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों के अद्भुत संगम का साक्षी बना। रावणा राजपूत समाज (भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, कोटा और बूंदी) के तत्वावधान में आयोजित नौवें सामूहिक विवाह सम्मेलन में 21 जोड़े वैदिक रीति-रिवाजों के साथ परिणय सूत्र में बंधे। हजारों लोगों की उपस्थिति में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने सामाजिक एकता और सहयोग का सशक्त संदेश दिया।
समारोह के मुख्य अतिथि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए रावणा राजपूत समाज के गौरवशाली इतिहास को याद किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह समाज सदियों से साहस, वीरता और समर्पण का प्रतीक रहा है और समय के साथ स्वयं को ढालते हुए निरंतर प्रगति कर रहा है।
ओम बिरला ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हाइफा युद्ध में वीरता दिखाने वाले मेजर दलपत सिंह के शौर्य का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे महान योद्धाओं का इतिहास आज भी युवाओं को देशभक्ति और बलिदान के लिए प्रेरित करता है। उनका यह संदर्भ उपस्थित युवाओं के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ।
कार्यक्रम के दौरान सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों की भी गूंज सुनाई दी। सेवा संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष रणजीत सिंह सोढ़ाला ने समाज को एक नाम से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की मांग लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष रखी। उन्होंने समाज के लोगों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहने और आने वाले चुनावों में समाजहित में कार्य करने वाले प्रतिनिधियों का समर्थन करने का आह्वान किया।
मुख्य संरक्षक दलपत सिंह सांखला ने जोधपुर हवाई अड्डे का नाम हाइफा के वीर नायक मेजर दलपत सिंह देवली के नाम पर रखने की मांग उठाई। साथ ही उन्होंने राजनीतिक प्रतिनिधित्व में समाज की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर सुरेश धाकड़ (बेगूं विधायक) ने बड़ा ऐलान करते हुए जोगणियां माता शक्तिपीठ में रावणा राजपूत समाज की धर्मशाला निर्माण के लिए विधायक कोष से 10 लाख रुपये देने की घोषणा की। इस घोषणा से उपस्थित लोगों में उत्साह की लहर दौड़ गई और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा।
आयोजन समिति के अध्यक्ष शंभु सिंह सोलंकी ने जानकारी दी कि सम्मेलन के दौरान तुलसी विवाह की परंपरा का निर्वहन करते हुए सभी 21 जोड़ों का विवाह विधिवत संपन्न कराया गया। दूल्हा-दुल्हन पारंपरिक वेशभूषा में सजे नजर आए और परिवारों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।
कार्यक्रम में सुभाष चंद्र बहेड़िया और सत्यनारायण जोशी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने समाज को एकजुट रहने और ऐसे आयोजनों के माध्यम से सामाजिक समरसता को मजबूत करने पर जोर दिया।
हजारों लोगों की उपस्थिति में सम्पन्न यह सामूहिक विवाह सम्मेलन न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता, सहयोग और परंपराओं को सहेजने का जीवंत उदाहरण भी बन गया। इस आयोजन ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और सामूहिकता की भावना को अपनाने का सशक्त संदेश दिया।
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