श्री प्रताप सिंह बारहठ कॉलेज में मनाया गया सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, राष्ट्रीय चेतना पर दिया गया जोर

खबर सार :-
रविवार को श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. पुष्कर राज मीणा ने की, और यह वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. मूलचंद खटीक के विशिष्ट संरक्षण में आयोजित हुआ।

श्री प्रताप सिंह बारहठ कॉलेज में मनाया गया सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, राष्ट्रीय चेतना पर दिया गया जोर
खबर विस्तार : -

भीलवाड़ाः श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय में रविवार को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हर्षोल्लास और राष्ट्रीय चेतना के वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य डॉ. पुष्कर राज मीणा की अध्यक्षता में किया गया, जबकि वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. मूलचंद खटीक विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद पूरे परिसर में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वातावरण बन गया।

प्राचार्य डॉ. पुष्कर राज मीणा ने किया संबोधित

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. पुष्कर राज मीणा ने कहा कि सोमनाथ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्रीय स्वाभिमान, सांस्कृतिक चेतना और संघर्षशील इतिहास का प्रतीक है। उन्होंने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार चंद्रदेव ने भगवान शिव की आराधना के बाद स्वर्ण निर्मित सोमनाथ मंदिर का निर्माण कराया था। उन्होंने कहा कि यह मंदिर समय-समय पर आक्रमणों का शिकार हुआ, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण कर इसे और अधिक भव्य रूप दिया गया।

देश के विकास में योगदान की अपील

उन्होंने 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी के आक्रमण का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय मंदिर को भारी क्षति पहुंचाई गई थी, लेकिन इसके बाद भी राजा भीमदेव, राजा भोज और अन्य शासकों ने इसके पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्र भारत में सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से इस मंदिर का पुनर्निर्माण संभव हुआ, जिसे 11 मई 1951 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्र को समर्पित किया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. मूलचंद खटीक ने अपने संबोधन में कहा कि 12 ज्योतिर्लिंग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि युवाओं को भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़कर देश के विकास में योगदान देना चाहिए।

कार्यक्रम के समापन पर प्रो. दिग्विजय सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। समारोह में प्रो. दलवीर सिंह, प्रो. अतुल कुमार जोशी, महाविद्यालय स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। पूरे कार्यक्रम में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की भावना स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

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