घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग: बारह ज्योतिर्लिंगों में अंतिम ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर महादेव महाराष्ट्र के संभाजीनगर में विराजते हैं। यह प्राचीन मंदिरों में से एक है। घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवान शंकर को समर्पित है। करुणा स्वरूप भगवान शिव का यह मंदिर, जहां शिव को घृष्णेश्वर या दया व करूणा के ईश्वर के स्वरूप में पूजा जाता है। ऐसे में मान्यता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं और इसके स्मरण मात्र से सभी रोगों से मुक्ति मिलती है। यह मंदिर एलोरा की विश्वप्रसिद्ध गुफाओं के पास स्थित है।
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग पूर्वमुखी है। इसको लेकर कहा जाता है कि घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग और देवगिरि दुर्ग के बीच एक सहस्रलिंग पातालेश्वर (सूर्येश्वर) महादेव का मंदिर है, जिनकी आराधना सूर्य भगवान करते हैं। इसीलिए यह ज्योतिर्लिंग भी पूर्वमुखी है। ऐसे में मान्यता है कि सूर्य द्वारा पूज्य होने के कारण घृष्णेश्वर त्रिविध तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) का हरण कर धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष जैसे सुख प्रदान करते हैं। शिव पुराण के अनुसार जिस तरह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा में चंद्रमा को देखकर सुख की अनुभूति होती है, उसी प्रकार घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन कर मनुष्य पाप मुक्त हो जाता है।
वहीं पद्मपुराण में इस ज्योतिर्लिंग के बारे में वर्णित है कि यहां रात में महादेव इसी शिवालय तीर्थ के पास ही बसते हैं। इसीलिए घृष्णेश्वर में शयन आरती का विशेष महत्व है। सभी जगह 108 शिवलिंग का महत्व बताया जाता है किंतु यहां पर 101 का महत्व है। 101 पार्थिव शिवलिंग बनाए जाते हैं और 101 ही परिक्रमा की जाती है।
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर द्वादश ज्योतिर्लिंग स्त्रोत में लिखा है...
इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम् ।
वन्दे महोदारतरस्वभावं घृष्णेश्वराख्यं शरणम् प्रपद्ये ॥
(जो इलापुर के सुरम्य मंदिर में विराजमान होकर समस्त जगत् के आराध्य हैं, जिनका स्वभाव बड़ा ही उदार है, उन घृष्णेश्वर नामक ज्योतिर्मय भगवान शिव की शरण में मैं जाता हूं।)
यहां पास में सरोवर के रूप में शिवालय है। मान्यता है कि इस ज्योतिर्लिंग की यात्रा बिना शिवालय दर्शन के पूरी नहीं होती। यहां पास में ‘लक्ष विनायक’ का मंदिर है। कथा के अनुसार तारकासुर के वध के बाद भगवान शंकर ने यहां गणेशजी की स्थापना कर उनकी पूजा की थी। यहां स्कंदमाता ने मूर्ति स्थापित की थी। यह मंदिर 21 गणेश पीठों में से एक है।
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित एलोरा की गुफाएं यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। इन गुफाओं में अद्भुत मूर्तियां और कलाकृतियां हैं, जिनमें छठी और नौवीं शताब्दी के हिंदू, बौद्ध और जैन शैलकृत मंदिर और मठ हैं।
भारत के अंतिम ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर महादेव और उनकी दिव्य महिमा
महाराष्ट्र के संभाजीनगर में स्थित घृष्णेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में अंतिम ज्योतिर्लिंग है। इस मंदिर का विशेष महत्व है क्योंकि यहां भगवान शिव को करुणा के ईश्वर के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इस पवित्र ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं और सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है।
’मंदिर का अनोखा महत्व’
- एलोरा की विश्वप्रसिद्ध गुफाओं के निकट स्थित यह मंदिर पूर्वमुखी है
- शिव पुराण के अनुसार इसके दर्शन से व्यक्ति पाप मुक्त हो जाता है
- यहां 101 पार्थिव शिवलिंग बनाए जाते हैं और 101 परिक्रमा की जाती है, जबकि अन्य स्थानों पर 108 का महत्व होता है
- पास में स्थित शिवालय सरोवर के दर्शन को मंदिर दर्शन का अभिन्न अंग माना जाता है
’अद्वितीय कथाएं एवं विशेषताएं’
1. इस क्षेत्र में मान्यता है कि भगवान सूर्य स्वयं पातालेश्वर महादेव की पूजा करते हैं
2. यहां लक्ष विनायक के रूप में गणेश जी की विशेष पूजा होती है, जो 21 गणेश पीठों में से एक है
3. मंदिर परिसर में स्कंदमाता की मूर्ति विराजमान है
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की महिमा का वर्णन द्वादश ज्योतिर्लिंग स्त्रोत में मिलता है, जहां इसे जगद्वरेण्यम् (समस्त जगत के आराध्य) कहा गया है। इसके दर्शन मात्र से व्यक्ति को त्रिविध तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) से मुक्ति मिलती है और धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। वर्तमान में यह स्थान न केवल आध्यात्मिक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल एलोरा की गुफाओं के निकट स्थित है, जहां छठी से नौवीं शताब्दी तक के अद्भुत हिंदू, बौद्ध व जैन मंदिरों की शिल्पकला देखने को मिलती है। घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के निर्माण के संबंध में ऐतिहासिक साक्ष्यों से पता चलता है कि इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप ’18वीं शताब्दी’ में ’अहिल्याबाई होल्कर’ द्वारा बनवाया गया था। इंदौर की यह रानी भगवान शिव की अनन्य भक्त थीं और उन्होंने कई प्रसिद्ध शिव मंदिरों का जीर्णाेद्धार करवाया था।
हालांकि, मंदिर के मूल स्वरूप की बात करें तो
1. मान्यताओं के अनुसार यह स्थान महाभारत काल से ही पूज्य रहा है
2. कुछ पुरातात्विक साक्ष्य इसे ’राष्ट्रकूट काल’ (8वीं-10वीं शताब्दी) से भी जोड़ते हैं
3. मराठा काल में इसका व्यापक पुनर्निर्माण हुआ
विशेष तथ्य
शिवमय है यह धाम, करुणा का है नाम - घृष्णेश्वर मंदिर का यह महत्व आज भी लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। क्या आप इस मंदिर की वास्तुकला या इससे जुड़ी किसी विशेष कथा के बारे में और जानना चाहेंगे? ’जहां करुणा का सागर बसता है, वह घृष्णेश्वर धाम है’ - यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक बल्कि ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भी अद्वितीय है।
अन्य प्रमुख खबरें
Aaj Ka Rashifal 12 January 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ, जानें कैसा रहेगा आपका दिन
Panchang 12 January 2026: सोमवार 12 जनवरी 2026 का पंचांग, जानें विशेष पर्व एवं राहुकाल
Aaj Ka Rashifal 11 January 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ, जानें कैसा रहेगा आपका दिन
Panchang 11 January 2026: रविवार 11 जनवरी 2026 का पंचांग, जानें विशेष पर्व एवं राहुकाल
Aaj Ka Rashifal 10 January 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ, जानें कैसा रहेगा आपका दिन
Panchang 10 January 2026: शनिवार 10 जनवरी 2026 का पंचांग, जानें विशेष पर्व एवं राहुकाल
Aaj Ka Rashifal 9 January 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ, जानें कैसा रहेगा आपका दिन
Panchang 9 January 2026: शुक्रवार 9 जनवरी 2026 का पंचांग, जानें विशेष पर्व एवं राहुकाल
Aaj Ka Rashifal 8 January 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ, जानें कैसा रहेगा आपका दिन
Panchang 8 January 2026: गुरुवार 8 जनवरी 2026 का पंचांग, जानें विशेष पर्व एवं राहुकाल
Aaj Ka Rashifal 7 January 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ, जानें कैसा रहेगा आपका दिन
Panchang 7 January 2026: मंगलवार 7 जनवरी 2026 का पंचांग, जानें विशेष पर्व एवं राहुकाल