नई दिल्ली : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने रविवार को नई दिल्ली के इंदिरा भवन में अपना 140वां स्थापना दिवस मनाया। इस दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फोटो साझा करते हुए लिखा, "कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीपीपी चेयरपर्सन सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में 'कांग्रेस स्थापना दिवस' पर झंडा फहराया। हमें मिलकर कांग्रेस के विजन और विचारधारा को हर व्यक्ति तक पहुंचाना है। हमें सभी के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है और एक समृद्ध भारत बनाना है। जय हिंद, जय कांग्रेस।
झंडा फहराने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस सदस्यों को स्थापना दिवस की बधाई दी और नए साल की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। पार्टी की शुरुआत दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को मुंबई में हुई थी और भारत की आजादी हासिल करने के लिए स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बलिदान दिया, जेल गए और कठिनाइयों का सामना किया।
खड़गे ने कांग्रेस के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने महिलाओं, गरीबों और समाज के सभी वर्गों के लोगों को राष्ट्रीय आंदोलन में एक साथ लाया। कांग्रेस का 1931 का कराची प्रस्ताव बाद में भारत के संविधान की नींव बना, लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि देश में लोकतंत्र अभी खतरे में है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने ग्रीन रिवॉल्यूशन, व्हाइट रिवॉल्यूशन, ऑटोमोबाइल और आईटी सेक्टर के विस्तार और कम्युनिकेशन क्रांति जैसी पहलों के जरिए देश को बदलने का श्रेय कांग्रेस सरकारों को दिया।
उन्होंने यूपीए सरकार की भी तारीफ करते हुए कहा कि सोनिया गांधी के नेतृत्व में नागरिकों के अधिकार मजबूत हुए और प्रधानमंत्री के तौर पर मनमोहन सिंह के कार्यकाल में लिए गए ऐतिहासिक फैसलों को दुनियाभर में पहचान मिली। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए खड़गे ने आरोप लगाया, "पिछले 11 साल में भाजपा सरकार ने कांग्रेस द्वारा बनाए गए संस्थानों को कमजोर किया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि जल, जंगल और जमीन खतरे में हैं। खड़गे ने आरएसएस पर संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया, यह दावा करते हुए कि उसके नेताओं ने एक बार तिरंगे और वंदे मातरम को मानने से इनकार कर दिया था। खड़गे ने इन चुनौतियों का सामना करने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया। साथ ही विरोधियों को सभ्य और गरिमापूर्ण तरीके से जवाब देने का आग्रह किया। उन्होंने महात्मा गांधी के इस विश्वास का हवाला देते हुए कहा कि लोकप्रिय समर्थन के बिना भी सच की आखिरकार जीत होती है।
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