US Congressman Statement: भारत अब केवल उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और रणनीति का अहम केंद्र बनता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी कांग्रेसमैन रो खन्ना (Ro Khanna) ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत अब केवल आर्थिक और सामरिक ताकत तक सीमित देश नहीं रहा, बल्कि तेजी से वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। ऐसे में अब भारत को दुनिया के बड़े मुद्दों पर अधिक सक्रिय और जिम्मेदार भूमिका निभानी होगी। वॉशिंगटन में आयोजित कैपिटल हिल समिट 2026 में कांग्रेसमैन ने कहा कि भारत को वैश्विक संघर्षों, लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर अधिक स्पष्ट और सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। फिलहाल, यह माना जा रहा है कि रो खन्ना का यह बयान यूक्रेन युद्ध में भारत की संभावित भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ सकता है।
रो खन्ना ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। ऐसे समय में भारत को यह तय करना होगा कि वह वैश्विक मंच पर खुद को किस रूप में देखना चाहता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई देश विश्व शक्ति बनना चाहता है, तो उसे वैश्विक संकटों और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों से दूरी बनाकर नहीं चलना चाहिए। खन्ना ने इस दौरान रक्षा, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा सहयोग पर आयोजित चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक निर्णयों को प्रभावित करने वाला देश बन चुका है। इसलिए उसे अंतरराष्ट्रीय विवादों और संघर्षों में संतुलित तथा प्रभावी भूमिका निभानी होगी।
अमेरिकी कांग्रेसमैन ने रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि भारत इस संघर्ष को समाप्त कराने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रिश्ते रहे हैं और यही वजह है कि भारत के पास संवाद के ऐसे रास्ते मौजूद हैं, जो अन्य देशों के लिए आसान नहीं हैं। खन्ना ने कहा कि उन्होंने अमेरिका और भारत दोनों जगह यह बात खुलकर कही है कि भारत यूक्रेन संकट में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत जैसे लोकतांत्रिक और प्रभावशाली देश की मध्यस्थता दुनिया के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
रो खन्ना ने भारत की पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पहले भारत किसी एक पक्ष के साथ खुलकर खड़े होने से बचता था, लेकिन अब बदलती वैश्विक परिस्थितियों में उसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अधिक स्पष्ट रुख अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं और उसकी वैश्विक भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल संतुलन बनाकर चलने की नीति पर्याप्त नहीं होगी। दुनिया यह देखना चाहती है कि लोकतंत्र, सुरक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दों पर भारत किस दिशा में खड़ा होता है।
हाल के वर्षों में व्यापार और टैरिफ को लेकर अमेरिका और भारत के बीच कुछ मतभेद जरूर देखने को मिले हैं। विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन के दौरान व्यापार नीतियों को लेकर तनाव बढ़ा था। इसके बावजूद रो खन्ना ने कहा कि दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दल भारत के साथ मजबूत साझेदारी के समर्थक हैं। खासकर रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के साझा हित लगातार मजबूत हो रहे हैं।
खन्ना ने जोर देकर कहा कि अमेरिका और भारत के संबंध केवल रणनीतिक हितों पर आधारित नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी लोकतंत्र, बहुलवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे साझा मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका को भी बहुसांस्कृतिक लोकतंत्र के रूप में और अधिक मजबूत बनना होगा तथा भारत के साथ उसी भावना से आगे बढ़ना होगा। उनके मुताबिक, यही साझा लोकतांत्रिक मूल्य आने वाले समय में दोनों देशों की साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।
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