नई दिल्लीः राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत एक बार फिर अपने पुराने राजनीतिक बयान को लेकर चर्चा में हैं। गहलोत ने उस घटनाक्रम का जिक्र किया है जब उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा थी, लेकिन अंतिम समय में परिस्थितियां बदल गईं और वह पार्टी के शीर्ष पद तक पहुंचने से चूक गए। उन्होंने दावा किया है कि उनके अध्यक्ष बनने की प्रक्रिया लगभग तय हो चुकी थी, लेकिन एक “बड़ी साजिश” के कारण पूरा घटनाक्रम बदल गया।
गहलोत ने कहा कि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने का निर्णय लगभग हो चुका था और वह इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार थे। उन्होंने कहा कि आज भी देश के अधिकांश लोगों को वास्तविक घटनाक्रम की जानकारी नहीं है और आम धारणा यही बनी हुई है कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ने से बचने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष बनने से इनकार कर दिया था।
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का पद केवल एक संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं बल्कि देश के राजनीतिक इतिहास से जुड़ा एक प्रतिष्ठित पद है। उन्होंने कहा कि जिस पद पर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, मोतीलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे दिग्गज नेता रहे हों, उस पद को स्वीकार करने से वह क्यों मना करते। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस अध्यक्ष बन रहा था। मैं अनपढ़ नहीं हूं, पढ़ा-लिखा हूं। मुझे इस पद के महत्व का पूरा एहसास है। ऐसे सम्मानित पद के लिए मैं मना क्यों करता?
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय अचानक ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी गईं, जिससे पूरा मामला उलझ गया। उनके अनुसार, राजस्थान में पार्टी पर्यवेक्षकों के पहुंचने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और राजनीतिक संकट खड़ा हो गया। उन्होंने संकेत दिया कि यह सब एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
गहलोत ने कहा कि उनके खिलाफ एक ऐसी धारणा बना दी गई कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते थे और इसी कारण पार्टी के भीतर विरोध की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि आज भी देशभर में यही माना जाता है कि उन्होंने अपने समर्थकों के जरिए बगावत करवाई ताकि मुख्यमंत्री पद उनके पास बना रहे। हालांकि उन्होंने इस धारणा को गलत बताते हुए कहा कि वास्तविकता कुछ और थी।
उन्होंने कहा कि पूरा देश यही मानता है कि अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने रहना चाहते थे, इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बने। लोगों के मन में यही बात बैठ गई है। अब मैं उन्हें कैसे समझाऊं कि सच क्या था? गहलोत ने दोहराया कि उनके खिलाफ बनी यह छवि घटनाओं के वास्तविक क्रम को नहीं दर्शाती।
गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले राजस्थान में राजनीतिक घटनाक्रम ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय यह माना जा रहा था कि गहलोत पार्टी अध्यक्ष बन सकते हैं, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदलीं और अंततः मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए।
गहलोत के ताजा बयान ने एक बार फिर उस दौर की राजनीतिक चर्चाओं को जीवित कर दिया है। उनके आरोपों और “साजिश” संबंधी दावे को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।
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