लखनऊः अखिलेश यादव ने प्रदेश में असमय बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि से फसलों को हुए भारी नुकसान को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि किसान लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहा है और उसे अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई है।
रविवार को जारी अपने बयान में सपा प्रमुख ने कहा कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खराब मौसम के कारण गेहूं, सरसों और अन्य फसलें बर्बाद हो गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अब तक प्रभावित किसानों को न तो मुआवजा दिया है और न ही कोई प्रभावी सहायता पहुंचाई है। इससे किसान आर्थिक संकट में फंस गया है और उसकी आजीविका पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
उन्होंने बताया कि मैनपुरी, कन्नौज, बाराबंकी, सीतापुर, हाथरस, अयोध्या, मेरठ, पीलीभीत, मथुरा, हरदोई, सोनभद्र और श्रावस्ती सहित कई जिलों में गेहूं की फसल बारिश के कारण भीगकर खराब हो गई है। कई स्थानों पर तेज हवाओं के चलते फसलें गिर गईं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया। ऐसे हालात में किसान दाने-दाने के लिए परेशान हो रहा है।
अखिलेश यादव ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री केवल ‘हवाई सर्वेक्षण’ कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई राहत कार्य नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और ऐसे में प्राकृतिक आपदाओं ने किसानों की स्थिति और भी दयनीय बना दी है, लेकिन सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है।
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार का रवैया किसान विरोधी है और वह केवल घोषणाओं तक सीमित है। उन्होंने कहा कि किसानों के गेहूं की खरीद ठीक से नहीं हो रही है और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो रही है।
उन्होंने आलू किसानों की समस्याओं का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्हें भी अपनी फसल का सही दाम नहीं मिला, जिसके चलते उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने मंडी व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। सपा सरकार के दौरान किसानों के लिए अनाज, आलू और अन्य फसलों की मंडियों के निर्माण का काम तेजी से चल रहा था, जिसे वर्तमान सरकार ने रोक दिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार उद्योगपतियों के हित में काम कर रही है और उसी के अनुरूप फैसले ले रही है, जबकि किसानों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने मांग की कि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए, फसल खरीद की प्रक्रिया को सुचारु किया जाए और किसानों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
उन्होंने अंत में कहा कि यदि सरकार ने समय रहते किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो इसका गंभीर असर न केवल किसानों पर बल्कि पूरे कृषि तंत्र और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
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