Eye cancer symptoms: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को खुद की देखभाल करने का समय ही नहीं मिलता है। शरीर में हो रही छोटी-बड़ी बदलाव को लोग मामूली समझकर टाल देते हैं, लेकिन ऐसा करना आपको भारी पड़ सकता है। एक रिसर्च के मुताबिक आजकल लोगों में आई कैंसर का खतरा ज्यादा बढ़ रहा है। यह आंख के अलग-अलग भाग में हो सकता है। यह रेटिना और आइरिस में होने की संभावना ज्यादा रहती है।
अगर आपके आंख में किसी भी तरह की परेशानी हो रही है, तो इसे आप भूलकर भी इग्नोर करने की गलती न करें। यह आई कैंसर का खतरा हो सकता है। आई कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण है कि इसमें आंख के भीतर मौजूद सेल्स लगातार बढ़ने लगती है। यह आंखों के कई हिस्सो को प्रभावित कर सकती है। इसका सबसे बड़ा खतरा रेटिना और आइरिस को है। इससे बचने का एक ही उपाय है कि समय रहते इसके लक्षण को पहचान कर इसका इलाज कराना। इसका सबसे बड़ा कारण है, लगातार आंखों से धुंधला दिखाई देना और आंखों में अक्सर दर्द बने रहना, कभी-कभी कोई सीधी लाइन आपको टेढ़ी दिखने लगे, पुतली का आकार अचानक बदला हुआ महसूस होना। अगर इस तरह के लक्षण दिखे तो आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
आई कैंसर एक ही तरह के नहीं होते हैं। ये कई तरह के होते हैं। इसमें सबसे ज्यादा चर्चित है इंट्राऑक्यूलर मेलानोमा, जो ज्यादातर वयस्क लोगों में पाया जाता है। इसमें आंखों से धुंधला दिखाई देने के साथ-साथ आंख की पुतली पर काले धब्बे का निशान पड़ जाना और पुतली का आकार अचानक बड़ा होना। छोटे बच्चों में अक्सर रेटिनोब्लास्टोमा नामक कैंसर ज्यादातर पाया जाता है। एक्सपर्ट के मुताबिक आंखों में हो रही इन बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसमें अक्सर देखा गया है कि आंखों के पास सूजन और गांठ की समस्या भी हो सकती है।
एक्सपर्ट की मानें तो आई कैंसर के शुरुआती केस ज्यादातर दर्द नहीं होता है। इसी कारण लोगों को इस बात का पता चलने में देर हो जाती है। अगर आप इससे बचना चाहते हैं, तो बराबर आई चेकअप कराते रहें। इससे आप शुरुआती स्टेज में ही इससे बच सकते हैं। यह ज्यादातर उन लोगों पर हावी होता है, जिनकी आंखें हल्की रंग की होती हैं या जिनके परिवार में पहले से ही इस बीमारी से पीड़ित लोग रह चुके हों। रिसर्च में यह भी पाया गया है कि ज्यादा समय तक आंखों का अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में रहना भी इसका मुख्य कारण बन सकता है।
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