World Earth Day : आज दुनिया भर में पृथ्वी दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर पूरी दुनिया अपने ब्लू प्लैनेट की रक्षा के लिए जागरूकता फैला रही है। एक ऐसा दिन जो हमें हमारे एकमात्र घर, पृथ्वी, की अहमियत और उसकी रक्षा की जिम्मेदारी का एहसास कराता है। इस वर्ष पृथ्वी दिवस की थीम “हमारी शक्ति, हमारा प्लैनेट” है, सौर मंडल का यह अनोखा “ब्लू प्लैनेट” न सिर्फ जीवन का आधार है, बल्कि अपनी विविधता, संतुलन और रहस्यों के कारण बेहद खास भी है। आइए, इस खास मौके पर जानते हैं पृथ्वी से जुड़े रोचक तथ्य।
पृथ्वी सौर मंडल का पांचवां सबसे बड़ा ग्रह है। यह सूर्य से तीसरे स्थान पर है और पास के शुक्र ग्रह से थोड़ा ही बड़ा है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हमारे पूरे सौर मंडल का एकमात्र ऐसा ग्रह है, जहां सतह पर तरल पानी मौजूद है। इसी पानी और अनुकूल तापमान की वजह से यहां जीवन संभव है। पृथ्वी के विशाल महासागरों ने लगभग 3.8 अरब साल पहले जीवन की शुरुआत की जगह प्रदान की थी।
अन्य ग्रहों के नाम ग्रीक या रोमन देवी-देवताओं पर रखे गए हैं, लेकिन पृथ्वी का नाम पुरानी अंग्रेजी और जर्मनिक भाषाओं से आया है। इसका मतलब सीधा सा “जमीन” है। भारत में हम इसे “पृथ्वी” कहते हैं, जो लगभग एक हजार साल पुराना नाम है। दुनिया की हजारों भाषाओं में इस ग्रह के अलग-अलग नाम हैं, लेकिन यह हर जगह जीवन का आधार है।
पृथ्वी का आकार भी खास है। इसका भूमध्यरेखीय व्यास करीब 12,756 किलोमीटर है। सूर्य से इसकी औसत दूरी 150 मिलियन किलोमीटर यानी एक खगोलीय इकाई (एयू) है। सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक पहुंचने में लगभग 8 मिनट का समय लेती है। पृथ्वी हर 23.9 घंटे में अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करती है, जिससे दिन और रात बनते हैं। सूर्य की परिक्रमा में इसे 365.25 दिन लगते हैं।
हर चार साल में लीप ईयर में एक अतिरिक्त दिन जोड़ा जाता है ताकि कैलेंडर सूर्य की परिक्रमा से मेल खाए। पृथ्वी की धुरी 23.4 डिग्री झुकी हुई है, इसी झुकाव की वजह से मौसमों का चक्र चलता है। गर्मी, सर्दी, वसंत और पतझड़ इसी कारण बनते हैं। हमारा चांद पृथ्वी को और खास बनाता है।
पृथ्वी सौर मंडल का एकमात्र ग्रह है जिसका सिर्फ एक चांद है। चांद पृथ्वी के घूमने को स्थिर रखता है, जिससे मौसम ज्यादा नहीं बदलता। वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों साल पहले एक बड़े पत्थर से टकराने के बाद पृथ्वी का कुछ हिस्सा अलग होकर चांद बना। चांद की औसत दूरी पृथ्वी से 3,84,400 किलोमीटर है।
पृथ्वी की बनावट भी रोचक है। यह चार मुख्य परतों से बनी है- आंतरिक कोर, बाहरी कोर, मेंटल और क्रस्ट। आंतरिक कोर लोहे और निकिल का ठोस गोला है जहां तापमान 5,400 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। बाहरी कोर तरल है और मेंटल सबसे मोटी परत है। पृथ्वी के कोई छल्ले नहीं हैं। लेकिन पृथ्वी को लेकर चिंता की बात यह है कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से पृथ्वी की कई विशेषताएं बदल रही हैं। तापमान बढ़ रहा है, महासागर गर्म हो रहे हैं और जीवन की संतुलित व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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