2040 तक प्लास्टिक बन सकता है सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन, दोगुना होगा स्वास्थ्य जोखिम : स्टडी
खबर सार :-
यह स्टडी चेतावनी देती है कि प्लास्टिक अब सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। अगर नए प्लास्टिक के उत्पादन पर नियंत्रण, गैर-जरूरी उपयोग में कटौती और टिकाऊ विकल्पों को नहीं अपनाया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। समय रहते नीतिगत और व्यवहारिक बदलाव ही इस खतरे को कम कर सकते हैं।
खबर विस्तार : -
The Lancet study: दुनिया ने अगर प्लास्टिक के उत्पादन, इस्तेमाल और निपटान के मौजूदा तरीकों में जल्द ठोस बदलाव नहीं किए, तो आने वाले वर्षों में यह इंसानी सेहत के लिए गंभीर संकट बन सकता है। द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी के मुताबिक, साल 2040 तक प्लास्टिक से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम दोगुने हो सकते हैं। शोध में कहा गया है कि प्लास्टिक का पूरा जीवनचक्र—कच्चा माल निकालने से लेकर उसके नष्ट होने तक-मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदायक है।
फॉसिल फ्यूल से शुरू होता है खतरा
स्टडी के अनुसार, दुनिया में बनने वाले 90 प्रतिशत से ज्यादा प्लास्टिक का स्रोत फॉसिल फ्यूल है। कोयला, तेल और गैस निकालने की प्रक्रिया से ही जहरीले उत्सर्जन शुरू हो जाते हैं। इसके बाद प्लास्टिक का उत्पादन, उपयोग और अंत में उसका निपटान या खुले में जलाया जाना, हर चरण में हवा, पानी और मिट्टी को प्रदूषित करता है।

2040 तक दोगुना हो सकता है सेहत पर असर
शोधकर्ताओं ने 2016 से 2040 के बीच प्लास्टिक खपत और कचरा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न संभावित परिदृश्यों का विश्लेषण किया। अगर मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे, तो 2040 तक प्लास्टिक से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान दोगुने हो सकते हैं। इसमें करीब 40 प्रतिशत असर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन और बढ़ते वैश्विक तापमान से होगा।
हवा और जहरीले रसायन बढ़ाएंगे बीमारी
रिसर्च के मुताबिक, प्लास्टिक उत्पादन से होने वाला वायु प्रदूषण कुल स्वास्थ्य प्रभावों में 32 प्रतिशत योगदान देगा। वहीं, प्लास्टिक के पूरे जीवनचक्र के दौरान पर्यावरण में छोड़े जाने वाले जहरीले रसायन 27 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा पानी की कमी, ओजोन परत को नुकसान और आयनाइजिंग रेडिएशन जैसे कारणों से भी स्वास्थ्य जोखिम बढ़ेंगे, हालांकि इनका योगदान 1 प्रतिशत से कम रहेगा।
कैंसर और गैर-संचारी रोगों का खतरा
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन की शोधकर्ता मेगन डीनी के अनुसार, प्लास्टिक से जुड़े उत्सर्जन ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण और विषैले तत्वों के जरिए इंसानों की सेहत को प्रभावित करते हैं। इससे कैंसर, हृदय रोग और अन्य गैर-संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा नुकसान प्लास्टिक के निर्माण और खुले में जलाने की प्रक्रियाओं से होता है।

स्वस्थ जीवन के करोड़ों साल होंगे कम
स्टडी में सामने आया कि अगर प्लास्टिक सिस्टम में नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर, सामग्री या उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव नहीं हुआ, तो स्वास्थ्य पर असर दोगुने से भी ज्यादा हो सकता है। जहां 2016 में प्लास्टिक के कारण 2.1 मिलियन स्वस्थ जीवन वर्ष का नुकसान हुआ था, वहीं 2040 तक यह आंकड़ा 4.5 मिलियन स्वस्थ जीवन वर्ष तक पहुंच सकता है। कुल मिलाकर 2016 से 2040 के बीच वैश्विक स्तर पर करीब 83 मिलियन स्वस्थ जीवन वर्ष नष्ट हो सकते हैं।
सिर्फ रीसाइक्लिंग काफी नहीं
शोध में साफ कहा गया है कि केवल प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करने और रीसाइक्लिंग सुधारने से बड़ी राहत नहीं मिलेगी। हालांकि, अगर रीसाइक्लिंग के साथ-साथ सामग्री में बदलाव और दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए, तो स्वास्थ्य नुकसान में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
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