मुख्यमंत्री हिमंता ने दोहराई पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता, बोले-जंगल होंगे अतिक्रमण मुक्त, खत्म होगा अवैध शिकार
खबर सार :-
‘अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस’ पर असम सरकार ने पर्यावरण संरक्षण, वन सुरक्षा और अवैध शिकार खत्म करने के अपने संकल्प को दोहराया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य को अतिक्रमण मुक्त और ‘जीरो पोचिंग’ मॉडल बनाने की दिशा में लगातार काम जारी रहेगा। असम की समृद्ध जैव विविधता और दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सरकार आधुनिक तकनीक और सख्त निगरानी व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही है।
खबर विस्तार : -
International Biodiversity Day: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने ‘अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस’ के अवसर पर राज्य में जैव विविधता संरक्षण, वन सुरक्षा और अवैध शिकार पर रोक लगाने को लेकर सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि असम सरकार जंगलों को अतिक्रमण से मुक्त कराने और राज्य को ‘जीरो पोचिंग’ मॉडल बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि असम की प्राकृतिक संपदा केवल राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश की धरोहर है। यहां के जंगल, वन्यजीव और जैव विविधता आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस दिशा में सरकार के प्रयासों को और तेज करने का भरोसा दिया।
सोशल मीडिया पर साझा किया प्रकृति संरक्षण का संदेश
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए असम की प्राकृतिक खूबसूरती और जैव विविधता की समृद्ध विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि असम हरे-भरे जंगलों, दुर्लभ वन्यजीवों और अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है, जिसे प्रकृति का विशेष वरदान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि Kaziranga National Park से लेकर Dehing Patkai National Park के घने जंगलों तक और Manas National Park से लेकर Maguri Beel तक, असम की धरती जैव विविधता के अनमोल खजाने से भरपूर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विशेष दिन पर राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने संकल्प को और मजबूत कर रही है।
जंगलों से अतिक्रमण हटाने की मुहिम तेज
असम सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में वन क्षेत्रों और आरक्षित जंगलों से अवैध अतिक्रमण हटाने के अभियान को तेज किया है। सरकार का कहना है कि पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करना राज्य की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से कई इलाकों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जंगलों में बढ़ते अतिक्रमण से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होता है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़ता है। सरकार का मानना है कि यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो जैव विविधता का संरक्षण भी प्रभावी तरीके से संभव हो सकेगा।
अवैध शिकार पर सख्त कार्रवाई जारी
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में अवैध शिकार यानी पोचिंग को पूरी तरह खत्म करने की बात भी दोहराई। असम सरकार ने राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों में निगरानी तंत्र को मजबूत किया है। विशेष रूप से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में एंटी-पोचिंग अभियान को काफी सख्ती से लागू किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक हाल के वर्षों में एक सींग वाले गैंडों के अवैध शिकार के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। आधुनिक तकनीक, ड्रोन निगरानी, वनकर्मियों की तैनाती और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से वन्यजीव संरक्षण को मजबूत किया गया है।

दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित घर है असम
असम देश और दुनिया में अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां कई विश्व प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य मौजूद हैं, जहां अनेक दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियां पाई जाती हैं। राज्य में एक सींग वाला गैंडा, रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, जंगली भैंसा और हुलॉक गिब्बन जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास मौजूद है। पर्यावरणविदों का मानना है कि इन प्रजातियों का संरक्षण वैश्विक स्तर पर भी बेहद महत्वपूर्ण है।
जैव विविधता दिवस का महत्व
हर वर्ष 22 मई को ‘अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस’ मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को प्रकृति, वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। बदलते जलवायु संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच जैव विविधता संरक्षण का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जंगल, जल स्रोत और वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे, तभी पर्यावरणीय संतुलन बना रहेगा। ऐसे में सरकारों के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी भी बेहद जरूरी है।
पर्यावरण संरक्षण को विकास से जोड़ने की कोशिश
असम सरकार अब पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। सरकार की कोशिश है कि पर्यटन, रोजगार और विकास परियोजनाओं को इस तरह आगे बढ़ाया जाए, जिससे जंगलों और वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचे। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य सरकार प्रकृति संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखती है।
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