असम में दहाड़ती कामयाबी: 16 साल में तीन गुना बढ़े टाइगर, पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बना राज्य
खबर सार :-
असम में बाघों की संख्या का तीन गुना बढ़ना यह साबित करता है कि सही नीति, राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण संभव है। यह सफलता न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल है। आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत को बचाने की दिशा में असम का प्रयास प्रेरणादायक है।
खबर विस्तार : -
Assam Tiger Census: देश में बाघ संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में असम ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार वर्ष 2006 में जहां राज्य में बाघों की संख्या महज 70 थी, वहीं 2022 तक यह आंकड़ा बढ़कर 227 हो गया है। यह बढ़ोतरी न केवल वन्यजीव संरक्षण की सफलता को दर्शाती है, बल्कि असम को देश के सबसे सुरक्षित प्राकृतिक आवासों में शामिल करती है।
मजबूत इच्छाशक्ति से बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए इस उपलब्धि को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रभावी नीतियों और सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि असम आज सिर्फ एक सींग वाले गैंडे के लिए ही नहीं, बल्कि बाघों समेत कई लुप्तप्राय वन्यजीव प्रजातियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुका है।
Assam Tiger Census: जनता और सरकार की साझेदारी
मुख्यमंत्री ने इस सफलता का श्रेय राज्य की जनता और स्थानीय समुदायों को देते हुए कहा कि लोगों के सहयोग और सामुदायिक भागीदारी के बिना यह संभव नहीं था। इको-डेवलपमेंट कमेटियों, जागरूकता अभियानों और स्थानीय स्तर पर सहभागिता ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में अहम भूमिका निभाई है।

Assam Tiger Census: संरक्षित वन क्षेत्रों की अहम भूमिका
आंकड़ों प गौर करें तो, पिछले दो दशकों में असम देश में वन्यजीव संरक्षण का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। काजीरंगा नेशनल पार्क, मानस नेशनल पार्क, ओरांग नेशनल पार्क और नामेरी नेशनल पार्क जैसे संरक्षित क्षेत्रों ने बाघों और अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों को सुरक्षित माहौल दिया है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल काजीरंगा जहां एक सींग वाले गैंडों की सबसे बड़ी आबादी के लिए प्रसिद्ध है, वहीं मानस नेशनल पार्क में बाघों के साथ-साथ पिग्मी हॉग जैसी दुर्लभ प्रजातियों की भी उल्लेखनीय वापसी हुई है।
एंटी-पोचिंग और टेक्नोलॉजी का असर
वन अधिकारियों के मुताबिक बाघों की संख्या में वृद्धि के पीछे सख्त एंटी-पोचिंग अभियान, मजबूत खुफिया तंत्र और गश्त में इजाफा प्रमुख कारण रहे हैं। कैमरा ट्रैप, ड्रोन निगरानी, जीपीएस आधारित पेट्रोलिंग और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से शिकारियों पर प्रभावी अंकुश लगाया गया है। इसके अलावा वन विभाग और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय ने संरक्षण प्रयासों को और मजबूत किया है।

Assam Tiger Census: संरक्षण के साथ विकास का संतुलन
असम सरकार का स्पष्ट रुख रहा है कि संरक्षण और विकास साथ-साथ चलें। संरक्षित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास, वन कर्मियों के लिए बेहतर आवास, प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही वन्यजीव कॉरिडोर की नियमित निगरानी कर जानवरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा रही है।
सिर्फ बाघ नहीं, पूरी जैव विविधता सुरक्षित
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सफलता केवल बाघों तक सीमित नहीं है। असम के जंगल अब हाथियों, हिरणों, पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के लिए भी कहीं अधिक सुरक्षित बन गए हैं। जैव विविधता के संरक्षण से पर्यावरण संतुलन मजबूत हुआ है और पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है।
अन्य प्रमुख खबरें
-
2026-06-22
-
2026-06-12
-
2026-06-05
-
2026-06-03
-
Wildfire in Pauri Garhwal forests: पौढ़ी गढ़वाल के जंगलों में लगी आग से स्कूल जलकर खाक
2026-05-30
-
Weather Update: मॉनसून को लेकर बुरी खबर, मौसम विभाग को मिली अल नीनो की आहट
2026-05-29
-
Delhi Mausam: 29 मई को ऑरेंज अलर्ट, 80 किमी के स्पीड से चलेंगी हवाएं
2026-05-28
-
दिल्ली-NCR में नौतपा से पहले मौसम ने ली करवट
2026-05-25
-
2026-05-25
-
ओडिशा में आंधी तूफान की चपेट में आकर तीन की मौत, सामुदायिक भोज के दौरान हुआ हादसा
2026-05-22
-
2026-05-22
-
Public Transport में Green Revolution की ओर बढ़ता भारतः 2035 तक हर तीन में से एक बस होगी इलेक्ट्रिक
2026-05-14
-
2026-05-07
-
World Earth Day : मौसम के चक्र से रोचक बनावट तक, अपने 'ब्लू प्लैनेट' के बारे में कितना जानते हैं आप?
2026-04-22
-
2040 तक प्लास्टिक बन सकता है सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन, दोगुना होगा स्वास्थ्य जोखिम : स्टडी
2026-01-27