Leprosy Awareness: बॉलीवुड के सितारे सिर्फ पर्दे पर ही चमक नहीं बिखेरते, बल्कि अपनी जिंदगी की असली कहानियों से भी लोगों को हिम्मत और प्रेरणा देते हैं। ऐसा ही उदाहरण हैं डिंपल कपाड़िया का। 1980 में फिल्म 'बॉबी' से रातों-रात सुपरस्टार बनी डिंपल ने बचपन में ही कुष्ठ रोग जैसी बड़ी चुनौती का सामना किया।
डिंपल को 12 साल की उम्र में ही यह बीमारी हुई थी। बचपन में ही उन्हें समाज में इसके प्रति भेदभाव और ताने झेलने पड़े। लेकिन उन्होंने तब भी हार नहीं मानी। अपना इलाज करवाया, पूरी तरह ठीक हुईं और फिल्मों में धमाल मचाया। आज वह खुले तौर पर अपनी कहानी साझा करती हैं ताकि लोग जानें कि कुष्ठ रोग कोई शर्मिंदगी नहीं है और इसका इलाज संभव है।
हर साल 23 जनवरी को कुष्ठ रोग जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इस दिन देशभर में अभियान चलाए जाते हैं ताकि लोगों को यह बताया जा सके कि समय पर इलाज से बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है। इसका उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि बीमारी से प्रभावित लोगों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। कुष्ठ रोग एक पुरानी संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री बैक्टीरिया के कारण होती है। 1873 में नॉर्वेजियन वैज्ञानिक गेरहार्ड हैंसेन ने इसे खोजा, इसलिए इसे हैंसेन रोग भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से त्वचा, नसों, हाथ-पैर और कभी-कभी आंखों को प्रभावित करता है। शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर हल्के धब्बे, सुन्नपन, बालों का झड़ना और घाव शामिल हैं। समय पर इलाज से यह पूरी तरह ठीक हो जाता है।
डिंपल कपाड़िया के अलावा, अमिताभ बच्चन और आर माधवन ने भी कुष्ठ रोग निवारण अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती बीमारी से ज्यादा समाज का रवैया है। सही इलाज के बाद लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं, लेकिन अक्सर तिरस्कार और अलगाव का सामना करना पड़ता है। अभिनेत्री डिंपल ने साझा किया कि 12 साल की उम्र में उनके कोहनी पर यह रोग था। एक व्यक्ति ने कहा कि उन्हें स्कूल से निकाल दिया जाएगा। उस समय उन्हें शब्द का मतलब भी नहीं पता था। लेकिन मुश्किल घड़ी में उन्हें फिल्म 'बॉबी' का मौका मिला। डिंपल कहती हैं कि कुष्ठ रोग ने उनकी जिंदगी का एक जादुई मोड़ बनाया, और उन्होंने साबित किया कि यह बीमारी शर्मिंदगी का कारण नहीं है।
मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने लंबे समय से जागरूकता फैलाई है। साल 2018 में उन्होंने निप्पॉन फाउंडेशन और डिसेबल्ड पीपल्स इंटरनेशनल की वैश्विक अपील का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक, आर्थिक और कानूनी भेदभाव को खत्म करना जरूरी है। आर. माधवन भी इस मुहिम से गहराई से जुड़े हैं। वह लेपरा इंडिया के गुडविल एंबेसडर हैं, जो कुष्ठ रोग, तपेदिक और अन्य बीमारियों के खिलाफ काम करता है। माधवन कहते हैं कि कुष्ठ रोग पूरी तरह से इलाज योग्य है और समय पर जांच व इलाज से इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है।
इन सितारों का मानना है कि कुष्ठ रोग अब डरावनी बीमारी नहीं रह गई है। जरूरी है कि समाज में कलंक खत्म हो और प्रभावित लोगों को सम्मान और प्यार मिले। प्रेम और समझदारी ही अकेलेपन और निराशा का सबसे प्रभावी इलाज है। डिंपल, अमिताभ और माधवन जैसी हस्तियों की वजह से कुष्ठ रोग पर लोगों की सोच बदल रही है। उनका संदेश है कि बीमारी से डरना नहीं चाहिए, बल्कि समय पर इलाज और जागरूकता से जीवन सामान्य हो सकता है।
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