मुंबई: क्रिकेट जगत में जब भी वेस्टइंडीज और इंग्लैंड की टीमें वानखेड़े के मैदान पर आमने-सामने होती हैं, तो 2016 के फाइनल की यादें ताजा हो जाती हैं। फ्लडलाइट्स की रोशनी में खेले गए इस मुकाबले में वेस्टइंडीज ने उसी इतिहास को दोहराते हुए इंग्लैंड को 30 रनों से करारी शिकस्त दी। शेरफेन रदरफोर्ड की गणनात्मक और पावरफुल हाफ-सेंचुरी और फिर ओस भरी परिस्थितियों में गुडाकेश मोती और रोस्टन चेज की घातक स्पिन गेंदबाजी ने इंग्लैंड के 12 मैचों में 11 जीत के शानदार क्रम को रोक दिया।

टॉस जीतकर इंग्लैंड ने गेंदबाजी का फैसला किया और शुरुआत में यह फैसला सही साबित होता दिखा। जोफ्रा आर्चर की 148 किमी/घंटा की रफ्तार और सैम करन की गेंदों ने वेस्टइंडीज को झकझोर दिया। केवल 7 वैध गेंदों के भीतर वेस्टइंडीज ने शाई होप और ब्रैंडन किंग के रूप में अपने दो महत्वपूर्ण विकेट खो दिए और स्कोर 8 रन पर 2 विकेट हो गया। लेकिन यहाँ से शेरफेन रदरफोर्ड ने मोर्चा संभाला। उन्होंने अपनी पारी को बखूबी बुना और अंत में विस्फोटक रूप अख्तियार किया। रदरफोर्ड ने नाबाद 76 रनों की पारी खेली। उन्हें जेसन होल्डर (33 रन, 17 गेंद) का भरपूर साथ मिला। दोनों ने मिलकर इंग्लैंड के गेंदबाजों, विशेषकर विल जैक्स और जोफ्रा आर्चर के ओवरों में जमकर रन बटोरे। रदरफोर्ड ने अपनी पारी में 7 छक्के जड़े, जिसकी बदौलत वेस्टइंडीज ने निर्धारित 20 ओवरों में 196/6 का विशाल स्कोर खड़ा किया। इंग्लैंड की ओर से आदिल रशीद सबसे किफायती रहे, जिन्होंने 4 ओवर में बिना कोई बाउंड्री दिए 16 रन पर 2 विकेट लिए।

197 रनों के पहाड़ जैसे लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत देखकर लगा मानो वे खेल को जल्दी खत्म करने के इरादे से आए हैं। फिल सॉल्ट ने दूसरे ही ओवर में जेसन होल्डर की गेंदों की ऐसी बखिया उधेड़ी कि एक ही ओवर में 24 रन कूट दिए। पावरप्ले खत्म होते-होते इंग्लैंड 67/1 के स्कोर पर खड़ा था और जोस बटलर के साथ जैकब बेथेल जिस तरह खेल रहे थे, मैच पूरी तरह इंग्लैंड की जेब में नजर आ रहा था। मगर कहानी में असली ट्विस्ट तब आया जब कप्तान ने गेंद स्पिनरों को सौंपी। गुडाकेश मोती और रोस्टन चेज की जोड़ी ने बीच के ओवरों में ऐसी कसी हुई गेंदबाजी की कि इंग्लैंड की रफ़्तार पर जैसे ब्रेक लग गया। रोस्टन चेज ने पहले कप्तान जोस बटलर (21) को लॉन्ग-ऑन के जाल में फंसाया, और फिर शुरू हुआ मोती का कहर। गुडाकेश मोती ने एक के बाद एक टॉम बैंटन, जैकब बेथेल (33) और फिर मैच पलटने का दम रखने वाले हैरी ब्रूक (17) को पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। मैदान पर ओस गिर रही थी, गेंद गीली थी, लेकिन इन दोनों स्पिनरों ने 8 ओवरों में महज 62 रन खर्च कर 5 विकेट झटक लिए। हालात ऐसे बन गए कि इंग्लैंड के मंझे हुए बल्लेबाज भी एक-एक रन के लिए तरसते दिखे।

मिडिल ऑर्डर के इस तरह घुटने टेकने के बाद इंग्लैंड की टीम फिर उठ नहीं सकी। जोफ्रा आर्चर का रन आउट होना और फिर रोस्टन चेज का आदिल रशीद को लपकने के लिए वो डाइविंग कैच, ये सब चीख-चीख कर कह रहे थे कि आज मैदान पर सिर्फ वेस्टइंडीज का राज है। सैम करन 43 रनों पर खूँटा गाड़कर खड़े तो रहे, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें कोई सहारा नहीं मिला। पूरी इंग्लिश टीम 166 रनों पर ढेर हो गई। इस जीत में वेस्टइंडीज की पावर-हिटिंग का जलवा भी दिखा, जहाँ उन्होंने छक्कों के मामले में इंग्लैंड को 13-6 के बड़े अंतर से पछाड़ा। यह जीत रदरफोर्ड के बल्ले और मोती-चेज की जादुई उंगलियों का साझा इनाम है। दूसरी तरफ, लगातार जीत रही इंग्लैंड के लिए यह हार किसी सबक से कम नहीं है, खासकर तब जब स्पिन के खिलाफ उनकी कमजोरी उजागर हुई है। अब शनिवार को स्कॉटलैंड के खिलाफ होने वाला मुकाबला उनके लिए साख बचाने की लड़ाई बन गया है।
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