जोहान्सबर्ग: भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए बुधवार की रात किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। वांडरर्स के ऐतिहासिक मैदान पर दक्षिण अफ्रीकी कप्तान लॉरा वोल्वार्ड्ट की तूफानी बल्लेबाजी के सामने भारतीय गेंदबाजों ने पूरी तरह घुटने टेक दिए। इस हार के साथ ही न केवल भारत ने 5 मैचों की टी20 सीरीज 0-3 से गंवाई, बल्कि पिछले दो साल से चला आ रहा द्विपक्षीय सीरीज जीतने का गौरवशाली रथ भी रुक गया।
दक्षिण अफ्रीका की जीत की पटकथा कप्तान लॉरा वोल्वार्ड्ट ने लिखी। उन्होंने महज 53 गेंदों पर 115 रनों की विध्वंसक पारी खेली। अपनी पारी के दौरान उन्होंने मैदान के हर कोने में चौके-छक्कों की बरसात की। यह महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास का संयुक्त रूप से तीसरा सबसे तेज शतक भी रहा। मैच का टर्निंग पॉइंट 13वां ओवर रहा, जब भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने वोल्वार्ड्ट का एक आसान सा कैच टपका दिया। उस वक्त दक्षिण अफ्रीका जीत की ओर बढ़ तो रहा था, लेकिन भारत के पास वापसी का मौका था। इस जीवनदान का फायदा उठाते हुए वोल्वार्ड्ट ने सुने लूस (64 रन) के साथ मिलकर 183 रनों की विशाल साझेदारी की और महज 16.3 ओवर में 193 रनों का लक्ष्य हासिल कर लिया।
इससे पहले, टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने बोर्ड पर 192 रनों का मजबूत स्कोर टांगा था। सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा (64) और स्मृति मंधाना (37) ने टीम को ठोस शुरुआत दी। मध्यक्रम में कप्तान हरमनप्रीत कौर ने अपनी फॉर्म वापस पाते हुए 38 गेंदों में 66 रनों की कप्तानी पारी खेली। अंत में ऋचा घोष के कैमियो की बदौलत भारत ने एक ऐसा स्कोर बनाया था, जिसे अमूमन टी20 में सुरक्षित माना जाता है।
192 रन बचाने उतरी भारतीय गेंदबाज शुरू से ही बेअसर दिखीं। पावरप्ले के दौरान दक्षिण अफ्रीका ने बिना किसी नुकसान के 72 रन ठोक दिए, जो उनके इतिहास का सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर है। अनुभवी दीप्ति शर्मा ने 3.3 ओवर में 46 रन लुटाए, वहीं युवा काश्वी गौतम को 2 ओवर में 32 रन पड़े। श्रेयंका पाटिल एकमात्र गेंदबाज रहीं जिन्हें सफलता मिली, लेकिन तब तक बाजी हाथ से निकल चुकी थी। भारतीय महिला टीम की द्विपक्षीय सीरीज में आखिरी हार जनवरी 2024 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ (1-2) आई थी। अब 3-0 से पिछड़ने के बाद टीम इंडिया के लिए सीरीज के बाकी दो मैच केवल साख बचाने की लड़ाई रह गए हैं।