Election Commission West Bengal Controversy : बंगाल में आर-पार: चुनाव आयोग ने टीएमसी को दी सीधी चेतावनी, कहा- 'सीईओ दफ्तर के बाहर गुंडागर्दी हुई तो खैर नहीं!'

खबर सार :-
Election Commission West Bengal Controversy : पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग और टीएमसी के बीच ठन गई है। सीईओ दफ्तर के बाहर हुई गुंडागर्दी पर आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए निष्पक्ष चुनाव का संकल्प दोहराया है। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Election Commission West Bengal Controversy : बंगाल में आर-पार: चुनाव आयोग ने टीएमसी को दी सीधी चेतावनी, कहा- 'सीईओ दफ्तर के बाहर गुंडागर्दी हुई तो खैर नहीं!'
खबर विस्तार : -

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनावी पारा अपने चरम पर है, लेकिन इस बार गरमाहट केवल रैलियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि चुनाव आयोग के दहलीज तक जा पहुँची है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के बाहर हुई भारी नारेबाजी और झड़प के बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि संवैधानिक संस्थाओं के बाहर किसी भी प्रकार की अराजकता या 'गुंडागर्दी' को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 रात भर चला हाई-वोल्टेज ड्रामा: टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ता भिड़े

मंगलवार की रात कोलकाता स्थित सीईओ कार्यालय के बाहर रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। घटना की शुरुआत तब हुई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते दोनों गुटों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। मामला सिर्फ कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहा; टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने पूरी रात कार्यालय के बाहर धरना दिया और जमकर नारेबाजी की। टीएमसी का आरोप है कि चुनाव आयोग और सीईओ कार्यालय केंद्र की सत्ताधारी दल भाजपा के इशारों पर काम कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि बंगाल की मतदाता सूची में जानबूझकर बाहरी राज्यों के लोगों के नाम शामिल किए जा रहे हैं ताकि चुनाव के परिणामों को प्रभावित किया जा सके।

 धारा 144 का उल्लंघन और आयोग की सख्ती

बुधवार सुबह सीईओ कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में इस पूरी अव्यवस्था के लिए सीधे तौर पर सत्ताधारी दल को जिम्मेदार ठहराया गया है। कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि परिसर के आसपास पहले से ही धारा 144 लागू थी, जिसका उल्लंघन कर भारी भीड़ जुटाई गई। सीईओ कार्यालय ने अपने बयान में कहा "बेलेघाटा के एक पार्षद और कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा मंगलवार रात कार्यालय का घेराव करना और नारेबाजी करना बेहद आपत्तिजनक है। कानून अपना काम करेगा और ऐसी गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। आयोग आगामी चरणों के चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध है।"

 ममता बनर्जी का 'फॉर्म-6' वाला गंभीर आरोप

इस विवाद की जड़ें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस पत्र में हैं, जो उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखा है। मुख्यमंत्री का आरोप है कि भाजपा एजेंट हजारों की संख्या में फर्जी 'फॉर्म-6' जमा कर रहे हैं ताकि गैर-बंगालियों को राज्य की वोटर लिस्ट में घुसाया जा सके। हालांकि, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मंगलवार शाम को उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और इसमें किसी भी तरह की धांधली की गुंजाइश नहीं है।

 सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, बैठकों का दौर जारी

हालात की गंभीरता को देखते हुए सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल ने उच्चाधिकारियों के साथ लंबी बैठक की है। सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। आयोग ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकेगा और स्वतंत्र चुनाव की प्रक्रिया में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बंगाल में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दो चरणों के मतदान में सुरक्षा बल इस तनाव को कैसे नियंत्रित करते हैं।

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