रिलायंस एडीए पर सीबीआई का बड़ा एक्शन, 7 शहरों में ताबड़तोड़ छापेमारी

खबर सार :-
रिलायंस एडीए समूह से जुड़े मामलों में सीबीआई की कार्रवाई ने कॉर्पोरेट और बैंकिंग जगत में हलचल बढ़ा दी है। हजारों करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे कर सकती है। इस मामले पर न्यायालय और जांच एजेंसियों की नजर लगातार बनी हुई है।

रिलायंस एडीए पर सीबीआई का बड़ा एक्शन, 7 शहरों में ताबड़तोड़ छापेमारी
खबर विस्तार : -

CBI Raids Reliance ADA Group:  केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में गुरुवार को बड़ा कदम उठाते हुए मुंबई, गुरुग्राम और बेंगलुरु में कुल सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशन के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच के तहत की गई। जांच एजेंसी ने मुंबई की विशेष अदालत से जारी तलाशी वारंट के आधार पर यह छापेमारी की।

जांच के घेरे में 2015 से 2017 के बीच के फैसले

सूत्रों के अनुसार, सीबीआई की यह कार्रवाई उन पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को केंद्र में रखकर की गई है, जिन्होंने वर्ष 2015 से 2017 के बीच कंपनी में अहम जिम्मेदारियां संभाली थीं। जांच एजेंसी ने जिन लोगों के परिसरों की तलाशी ली, उनमें तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) और निदेशक स्तर के अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के आवासों और कार्यालयों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी सामग्री जब्त की गई है। सीबीआई अब इन दस्तावेजों का विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कंपनी के वित्तीय निर्णयों और बैंकिंग प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं। एजेंसी को आशंका है कि कुछ लेन-देन में जानबूझकर तथ्यों को छिपाया गया और बैंकों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

बैंकों और एलआईसी की शिकायतों के बाद दर्ज हुए सात मामले

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह पूरा मामला विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की शिकायतों पर आधारित है। इन शिकायतों के बाद सीबीआई ने पिछले कुछ महीनों में रिलायंस एडीए समूह से जुड़े कुल सात अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में हजारों करोड़ रुपए की वित्तीय गड़बड़ियों और कथित घोटालों का आरोप लगाया गया है। प्राथमिक जांच में अनुमानित वित्तीय नुकसान करीब 27,337 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि ऋण वितरण, फंड ट्रांसफर और कॉर्पोरेट निर्णयों के दौरान बैंकिंग नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

पहले भी हो चुकी है कई स्थानों पर छापेमारी

सीबीआई इससे पहले भी इस मामले में कई राज्यों में व्यापक तलाशी अभियान चला चुकी है। पिछले महीनों में एजेंसी ने लगभग 31 स्थानों पर छापेमारी की थी, जहां से कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जुटाए गए थे। इन साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने जांच का दायरा और बढ़ाया है। इसी क्रम में 20 अप्रैल को दो वरिष्ठ अधिकारियों डी. विश्वनाथ और अनिल काल्या को गिरफ्तार किया गया था। दोनों अधिकारियों पर बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन में संदिग्ध भूमिका निभाने का आरोप है। फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ जारी है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच

सूत्रों के मुताबिक, अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह से जुड़े इन मामलों की निगरानी उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत की जा रही है। जांच एजेंसियां धन के प्रवाह, ऋण स्वीकृति प्रक्रिया, निवेश पैटर्न और कॉर्पोरेट निर्णयों की गहन पड़ताल कर रही हैं। सीबीआई का मानना है कि जांच में सामने आने वाले दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड इस पूरे मामले में कई अहम खुलासे कर सकते हैं। आने वाले दिनों में एजेंसी कुछ और अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है और जरूरत पड़ने पर नई कार्रवाई भी संभव है।

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