Robert Vadra statement after Bail: शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार को कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा को बड़ी राहत मिली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। अदालत से राहत मिलने के बाद रॉबर्ट वाड्रा ने खुलकर अपनी बात रखी और कहा कि वह निडर हैं, उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह हर जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि एजेंसी सरकार के इशारों पर काम कर रही है, लेकिन वह कानून और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं।
जमानत मिलने के बाद रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, “मैं यहीं हूं, मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। मैं हमेशा जांच एजेंसियों के सामने उपस्थित रहूंगा और हर सवाल का जवाब दूंगा। जो भी कानूनी औपचारिकताएं होंगी, उन्हें पूरा करूंगा।” उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक माहौल और उनके परिवार की लोकप्रियता के कारण उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। वाड्रा बोले, “अगर हम चुनाव जीत रहे हैं, अगर लोग आज भी मेरे परिवार को चाहते हैं, तो जाहिर है कि मुझे इन चीजों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन मुझमें इसे झेलने की पूरी क्षमता और हिम्मत है।” उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लोकसभा चुनाव के बाद विपक्ष और सरकार के बीच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर लगातार बहस जारी है।
रॉबर्ट वाड्रा शनिवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। उनके वकील ने अदालत में दलील दी कि जांच के दौरान वाड्रा को कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और उन्होंने हर बार जांच में सहयोग किया है। इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई तय की है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह फैसला फिलहाल वाड्रा के लिए राहत जरूर है, लेकिन मामले की जांच और सुनवाई अभी जारी रहेगी।
यह मामला हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शिकोहपुर गांव की जमीन खरीद से जुड़ा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ‘स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड’ ने फरवरी 2008 में लगभग 3.5 एकड़ जमीन ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड से खरीदी थी। ईडी का आरोप है कि यह जमीन करीब 7.50 करोड़ रुपये में खरीदी गई, जबकि कंपनी की वित्तीय क्षमता सीमित थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस सौदे में वास्तविक भुगतान नहीं हुआ और बिक्री विलेख में कई तथ्य छिपाए गए।

ईडी ने अपनी जांच में आरोप लगाया है कि बिक्री दस्तावेजों में ऐसे चेक का उल्लेख किया गया जो कथित तौर पर कभी जारी ही नहीं हुए या भुनाए नहीं गए। एजेंसी का यह भी कहना है कि जमीन की वास्तविक कीमत कम दिखाई गई ताकि स्टांप शुल्क कम देना पड़े। जांच एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 423 के तहत इसे अपराध माना है। ईडी के मुताबिक, इस मामले में करीब 58 करोड़ रुपये की कथित अवैध आय की पहचान की गई है। इसके अलावा ईडी ने 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क भी किया है, जिनकी अनुमानित कीमत 38.69 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
रॉबर्ट वाड्रा के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस लंबे समय से केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाती रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि जांच एजेंसियां कानून के दायरे में स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। वाड्रा का “मैं निडर हूं” वाला बयान अब राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और जांच दोनों पर सबकी नजर बनी रहेगी।
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