नई दिल्ली/पुट्टपर्थी: भारतीय रक्षा गलियारों में आज एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। भारत ने अपनी सैन्य शक्ति को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए अब तक का सबसे साहसिक कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में आज आंध्र प्रदेश की धरती से एक ऐसी परियोजना का आगाज़ हो रहा है, जो आने वाले दशकों में दक्षिण एशिया का शक्ति संतुलन हमेशा के लिए बदल देगी। यह परियोजना है- Advanced Medium Combat Aircraft (उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान), जिसे दुनिया 'एमका' के नाम से जानती है।
आंध्र प्रदेश के श्रीसत्य साईं जिले के पुट्टपर्थी में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के 'विमान एकीकरण और उड़ान परीक्षण केंद्र' (Aircraft Integration and Flight Test Centre) की आधारशिला रखी जाना महज़ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह चीन और अमेरिका जैसे देशों के विशेष क्लब में भारत की एंट्री का टिकट है। यह केंद्र भारत के पहले स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट, Advanced Medium Combat Aircraft के सपनों को पंख देगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि पांचवीं पीढ़ी के विमानों का विकास किसी भी देश के लिए सबसे जटिल इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक होता है। इस केंद्र के बनने से विमानों के पुर्जों को जोड़ने (Integration), उनके कड़े परीक्षण (Testing) और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रमाणन (Certification) की प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेज़ी आएगी। अब तक भारत को अपनी कई परीक्षण प्रणालियों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन यह केंद्र हमें पूर्ण रूप से 'आत्मनिर्भर' बना देगा।
सिर्फ आसमान ही नहीं, बल्कि समंदर की गहराइयों में भी भारत अपनी पैठ मजबूत कर रहा है। रक्षा मंत्री द्वारा अनाकापल्ली के टी. सिरासपल्ली में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) की नौसेना प्रणाली निर्माण सुविधा (Naval Systems Manufacturing Facility) की नींव रखी जा रही है। यह केंद्र भारतीय नौसेना के लिए उन्नत जलमग्न हथियार (Underwater Weapons) तैयार करेगा। हिंद महासागर में बढ़ती चुनौतियों के बीच, स्वदेशी टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन हथियारों का निर्माण भारत की समुद्री सीमा को अभेद्य दीवार में तब्दील कर देगा।
सरकार के साथ-साथ निजी क्षेत्र भी इस महायज्ञ में आहुति दे रहा है। कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड (Kalyani Strategic Systems Limited) की सहायक कंपनी 'अग्नेयास्त्रा एनर्जेटिक्स' और एचएफसीएल (HFCL) के गोला-बारूद संयंत्र इस बात का प्रमाण हैं कि अब भारतीय कंपनियां वैश्विक रक्षा बाज़ार में डंका बजाने को तैयार हैं।
सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाली परियोजना कुरनूल की 'ड्रोन सिटी' (Drone City) है। भविष्य के युद्धों में ड्रोन की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। यूक्रेन-रूस युद्ध ने दिखा दिया है कि एक छोटा सा ड्रोन भी बड़े युद्धपोत को तबाह कर सकता है। कुरनूल में प्रस्तावित यह समर्पित केंद्र ड्रोन अनुसंधान, निर्माण और परीक्षण का हब बनेगा, जिससे न केवल सेना बल्कि कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी क्रांति आएगी।
इस भव्य समारोह के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इन समझौतों का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था और युवाओं के रोजगार पर पड़ेगा। रक्षा विनिर्माण (Defense Manufacturing) और एयरोस्पेस (Aerospace) निवेश के माध्यम से आंध्र प्रदेश देश के नक्शे पर एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनकर उभर रहा है।
Advanced Medium Combat Aircraft (एमका) जैसी परियोजनाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि हथियार बनाने वाला और निर्यात करने वाला देश बनने की ओर अग्रसर है। 'आत्मनिर्भर भारत' का यह विजन अब कागजों से निकलकर पुट्टपर्थी और कुरनूल की जमीन पर हकीकत बनता दिख रहा है। यह पहल रक्षा क्षेत्र में भारत की संप्रभुता को न केवल सुरक्षित करेगी बल्कि वैश्विक मंच पर एक 'सुपरपावर' के रूप में हमारी स्थिति को भी सुदृढ़ करेगी।
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