नई दिल्लीः नीट यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले की जांच तेज हो गई है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी धनंजय लोखंडे को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने 6 दिनों की सीबीआई कस्टडी में भेज दिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने लोखंडे को गुरुवार को गिरफ्तार किया था और शुक्रवार को अदालत में पेश कर उसकी हिरासत की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
सीबीआई का कहना है कि नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामला एक बड़े संगठित नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। एजेंसी को आशंका है कि इस मामले की जड़ें कई राज्यों तक फैली हो सकती हैं और इसमें संगठित गिरोह या सिंडिकेट की भूमिका सामने आ सकती है।
इससे पहले गुरुवार को पांच अन्य आरोपियों को भी राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट ने सीबीआई की मांग को मंजूर करते हुए उन्हें 7 दिनों की कस्टडी में भेज दिया था। एजेंसी का कहना है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
गौरतलब है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 12 मई 2026 को इस मामले में आधिकारिक रूप से केस दर्ज किया था। यह कार्रवाई शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत के आधार पर की गई थी। शिकायत में नीट यूजी 2026 परीक्षा के दौरान कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी।
सीबीआई की विशेष टीमें देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार छापेमारी और जांच अभियान चला रही हैं। एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और परीक्षा केंद्रों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्नपत्र किस स्तर पर लीक हुआ और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे।
नीट यूजी 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और दोबारा परीक्षा कराने की मांग की।
जांच एजेंसियों की शुरुआती रिपोर्ट में परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। अब राष्ट्रीय स्तर पर दोबारा परीक्षा आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इस फैसले से लाखों छात्रों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें फिर से परीक्षा की तैयारी करनी होगी।
सीबीआई का मानना है कि पेपर लीक का यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे रैकेट में कौन-कौन लोग शामिल थे, किस स्तर पर लापरवाही हुई और परीक्षा प्रणाली में सेंध कैसे लगी।
इस बीच, मामले की जांच और गिरफ्तारियों के चलते शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार और जांच एजेंसियों पर अब इस मामले में जल्द और निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है।
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