भारतीय सेना को मिली बड़ी ताकत, सूरत के स्टार्टअप ने 60 दिन में बनाए 100 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन

खबर सार :-

विशेषज्ञों का मानना है कि इनसाइड एफपीवी जैसी कंपनियों की सफलता न केवल भारतीय रक्षा क्षेत्र को नई मजबूती दे रही है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि देश के युवा नवाचार और स्वदेशी तकनीक के दम पर वैश्विक रक्षा उद्योग में अपनी अलग पहचान बनाने की क्षमता रखते हैं।
भारतीय सेना को मिली बड़ी ताकत, सूरत के स्टार्टअप ने 60 दिन में बनाए 100 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन

खबर विस्तार : -

सूरत: गुजरात के सूरत स्थित डिफेंस टेक स्टार्टअप इनसाइड एफपीवी (Inside FPV) ने भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने भारतीय सेना के लिए मात्र 60 दिनों के भीतर 100 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन तैयार कर डिलीवर किए हैं। डिफेंस इंडस्ट्री में इसे अब तक की सबसे तेज डिलीवरी में से एक माना जा रहा है। इस उपलब्धि के साथ सूरत ने देश के रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत अभियान में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

स्टार्टअप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अर्थ चौधरी ने बताया कि इस उपलब्धि के पीछे भारत सरकार और गुजरात सरकार का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी को केंद्र सरकार से आवश्यक समर्थन मिला, जबकि गुजरात सरकार ने स्टार्टअप को ग्रांट देने के साथ-साथ स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति के तहत निवेश भी किया। उन्होंने कहा कि महज 60 दिनों में 100 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन तैयार करना पूरी टीम के लिए गर्व का विषय है।

अर्थ चौधरी के अनुसार, यह ड्रोन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और भविष्य के युद्धों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से यह साबित होता है कि भारतीय स्टार्टअप भी अत्याधुनिक रक्षा तकनीक विकसित करने में सक्षम हैं।

 क्या हैं कामिकेज ड्रोन की खासियतें?

कंपनी द्वारा विकसित कामिकेज ड्रोन कई अत्याधुनिक विशेषताओं से लैस हैं। यह एक वन-टाइम यूज (Single Use) ड्रोन है, जिसे लक्ष्य पर हमला करने के बाद वापस नहीं लाया जाता। यह ड्रोन 250 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से उड़ान भर सकता है और उच्च सटीकता के साथ लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम है।

इसकी मारक क्षमता को बेहद प्रभावी बताया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसकी निर्माण लागत विदेशी प्रणालियों की तुलना में लगभग 100 गुना कम बताई जा रही है। कम लागत और उच्च क्षमता के कारण यह भारतीय सेना के लिए एक किफायती और प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है।

 भविष्य के युद्धों में होगी अहम भूमिका

रक्षा विशेषज्ञ टी.पी. त्यागी ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में ड्रोन आधारित युद्ध प्रणाली का महत्व लगातार बढ़ेगा। उनके अनुसार, इनसाइड एफपीवी द्वारा विकसित कामिकेज ड्रोन भविष्य के युद्धों में भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक स्टार्टअप की सफलता नहीं, बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

 स्टार्टअप को मिला सरकारी सहयोग

गुजरात सरकार लंबे समय से नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। युवाओं में उद्यमिता और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 2017-18 में स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी (SSIP) शुरू की गई थी। इस नीति की सफलता के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में वर्ष 2022 में स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी 2.0 (SSIP 2.0) लागू की गई।

इस नई नीति के तहत रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप टेक, रोबोटिक्स, एयरोस्पेस सहित पारंपरिक और उभरती तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है।

 हजारों युवाओं को मिला रोजगार

राज्य सरकार की स्टार्टअप सृजन सीड सपोर्ट योजना के अंतर्गत अब तक 400 से अधिक स्टार्टअप्स को लगभग 28 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। आई-हब से जुड़े स्टार्टअप्स ने राज्य में 4,000 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित किए हैं। वहीं इन स्टार्टअप्स का कुल बाजार मूल्य लगभग 3,569 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

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