Special Parliament session : संसद के विशेष सत्र पर मचा घमासान, स्टालिन की खुली चेतावनी, कांग्रेस ने सरकार को बताया 'बुलडोजर मानसिकता' का प्रतीक

खबर सार :-
Special Parliament session : संसद के विशेष सत्र को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है। कांग्रेस ने इसे 'लोकतंत्र का मजाक' बताया है, वहीं तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने परिसीमन को लेकर सीधी चेतावनी दी है।

Special Parliament session : संसद के विशेष सत्र पर मचा घमासान, स्टालिन की खुली चेतावनी, कांग्रेस ने सरकार को बताया 'बुलडोजर मानसिकता' का प्रतीक
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बार फिर संसद के विशेष सत्र को लेकर घमासान छिड़ गया है। केंद्र सरकार द्वारा 16 अप्रैल से बुलाए गए तीन दिवसीय विशेष सत्र ने विपक्षी दलों के तेवरों को तीखा कर दिया है। कांग्रेस ने जहाँ सरकार पर संसदीय परंपराओं को ताक पर रखने का आरोप लगाया है, वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र को सीधी चेतावनी देते हुए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

 Special Parliament session :  लोकतंत्र का मजाक और 'बुलडोजर मानसिकता'

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए इसे "लोकतंत्र का पूरा मजाक" करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि सत्र शुरू होने में अब बहुत कम समय बचा है, लेकिन मंगलवार सुबह तक सांसदों के साथ उन संविधान संशोधन विधेयकों की प्रति साझा नहीं की गई है, जिन पर बहस और वोटिंग होनी है। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए इसे "बुलडोजर मानसिकता" बताया। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की जायज मांगों को नजरअंदाज कर रही है और चुनाव प्रचार के बीच में सत्र बुलाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित कर रही है।

Special Parliament session :  सोनिया गांधी ने जताया 'परिसीमन' पर कड़ा ऐतराज

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक प्रमुख समाचार पत्र में लेख के जरिए सरकार के इरादों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य मुद्दा केवल 'महिला आरक्षण' नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपा 'परिसीमन' (Delimitation) का खेल है। सोनिया गांधी ने प्रस्तावित परिसीमन को "संविधान पर हमला" और "अत्यंत खतरनाक" करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की यह जल्दबाजी केवल राजनीतिक लाभ लेने और जाति जनगणना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को ठंडे बस्ते में डालने की एक सोची-समझी रणनीति है।

Special Parliament session : एमके स्टालिन की केंद्र को दो-टूक चेतावनी

विपक्ष की इस घेराबंदी में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन सबसे मुखर नजर आ रहे हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार को स्पष्ट शब्दों में आगाह किया है कि यदि परिसीमन के माध्यम से दक्षिणी राज्यों के हितों को किसी भी प्रकार की चोट पहुंचाई गई या उनके साथ भेदभाव हुआ, तो राज्य सरकार एक व्यापक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेगी। मुख्यमंत्री स्टालिन ने केंद्र की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव के ऐन बीच में इस तरह जबरन विशेष सत्र बुलाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन भी है। उन्होंने सरकार की मंशा पर संदेह जताते हुए आरोप लगाया कि बिना किसी पारदर्शिता के और विपक्षी दलों को जानकारी दिए बिना जिस तरह से संविधान संशोधन बिलों को पारित करने की कोशिश की जा रही है, वह संघीय ढांचे के लिए एक बड़ा खतरा है।

 Special Parliament session : मल्लिकार्जुन खड़गे ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को विश्वास में लिए बिना इतना बड़ा निर्णय लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। खड़गे ने मांग की है कि 29 अप्रैल को चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और तभी इन विधेयकों पर चर्चा हो। उन्होंने कहा, "नोटबंदी, जीएसटी और जनगणना जैसे मामलों में सरकार का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड ऐसा रहा है कि उन पर भरोसा करना कठिन है। बिना विवरण साझा किए सार्थक चर्चा संभव नहीं है।" बता दें कि बजट सत्र की अवधि को बढ़ाकर 16 से 18 अप्रैल तक यह विशेष बैठक बुलाई गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन करना है, ताकि इसे 2029 से प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

Special Parliament session :  चुनाव और संसद सत्र का टकराव

विपक्ष का तर्क है कि यह सत्र उस समय आयोजित किया जा रहा है जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि तमिलनाडु में भी 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। ऐसे में विपक्षी नेताओं का मानना है कि बीजेपी इस सत्र के जरिए चुनावी लाभ (Political Mileage) उठाने की कोशिश कर रही है। अब देखना यह होगा कि विपक्षी एकजुटता और स्टालिन की चेतावनी के बीच केंद्र सरकार अपने इस विशेष सत्र को किस तरह आगे बढ़ाती है। क्या सरकार सर्वदलीय बैठक की मांग स्वीकार करेगी या फिर अपने एजेंडे पर अडिग रहेगी? यह आने वाले कुछ दिन तय करेंगे।

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