मुंबईः मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) के लाखों वाहन चालकों और घरेलू उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) ने शनिवार को कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस बढ़ोतरी के बाद एमएमआर में सीएनजी का खुदरा मूल्य बढ़कर 86 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। नई दरें मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और एमजीएल की ओर से सेवा दिए जाने वाले अन्य क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
यह मई महीने के भीतर सीएनजी की दूसरी मूल्य वृद्धि है। इससे पहले 14 मई को भी कंपनी ने सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा किया था। यानी महज 17 दिनों के भीतर सीएनजी के दाम कुल 4 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ चुके हैं। लगातार बढ़ती कीमतों से टैक्सी, ऑटो और निजी वाहन चालकों की परिचालन लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सीएनजी के साथ-साथ पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) उपभोक्ताओं को भी राहत नहीं मिली है। एमजीएल ने घरेलू उपयोग के लिए पाइप के जरिए आपूर्ति की जाने वाली कुकिंग गैस की कीमतों में 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की है। कंपनी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में जारी दबाव, कच्चे ईंधन की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण गैस आपूर्ति की लागत बढ़ी है, जिसका असर उपभोक्ता दरों पर पड़ा है।
मुंबई में शनिवार को पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 97.83 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई। इससे पहले सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने सोमवार को पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी। पिछले दो सप्ताह के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में यह चौथी बढ़ोतरी मानी जा रही है।
बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच केंद्र सरकार भी आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए सक्रिय नजर आ रही है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे घरेलू मांग के कम से कम 30 दिनों के बराबर लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का भंडार बनाए रखें। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित आपूर्ति संकट की स्थिति में उपभोक्ताओं को परेशानी से बचाना है।
मंत्रालय ने हाल ही में जानकारी दी कि सरकार के निर्देशों के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 550 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठा रही हैं। कंपनियां वैश्विक बाजार में बढ़ी लागत का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाल रही हैं, जिससे उन्हें वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार का कहना है कि देश में कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर्याप्त है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में घबराहट में की गई खरीदारी के कारण अस्थायी कमी की स्थिति देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना रहता है, तो आने वाले समय में ईंधन दरों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में आम उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र की लागत पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।
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