Mohan Bhagwat Tripura Visit : संघर्षों में फंसी दुनिया को भारत का 'दृष्टिकोण' ही उबारेगा - मोहन भागवत

खबर सार :-
Mohan Bhagwat Tripura Visit : त्रिपुरा में मां सौंदर्य चिन्मयी मंदिर के उद्घाटन पर बोले डॉ. मोहन भागवत- दुनिया को दिशा दिखा रहा है सनातन धर्म। जानें उन्होंने क्यों कहा कि भारत को बांटने की कोशिश कर रही हैं बाहरी ताकतें।

Mohan Bhagwat Tripura Visit : संघर्षों में फंसी दुनिया को भारत का 'दृष्टिकोण' ही उबारेगा - मोहन भागवत
खबर विस्तार : -

अगरतला: पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों के बीच आध्यात्मिक चेतना का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। पश्चिम त्रिपुरा के मोहनपुर स्थित फकीरमुरा गांव में आदि शंकराचार्य जयंती के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने 'मां सौंदर्य चिन्मयी मंदिर' का लोकार्पण किया। प्राण प्रतिष्ठा और कुंभाभिषेक के इस अनुष्ठान के दौरान डॉ. भागवत ने न केवल मंदिर के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सनातन संस्कृति की भूमिका पर भी विस्तार से अपनी बात रखी।

 Mohan Bhagwat Tripura Visit : शक्ति और भक्ति का समन्वय ही सत्य की स्थापना

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. भागवत ने एक गहरे जीवन दर्शन की ओर संकेत किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के लिए केवल सत्य को जान लेना ही पर्याप्त नहीं है। उस सत्य को समाज में प्रतिष्ठित करने के लिए 'शक्ति' की भी उतनी ही आवश्यकता है। उनके अनुसार, भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता यही रही है कि यहाँ शक्ति और भक्ति साथ-साथ चलते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्ञान का अर्थ केवल शब्दों का पांडित्य नहीं, बल्कि उसे आत्मसात करना और समझना है।

Mohan Bhagwat Tripura Visit :  दुनिया के विफल प्रयोग और भारत की प्रासंगिकता

पिछले दो हजार वर्षों के इतिहास को खंगालते हुए सरसंघचालक ने कहा कि दुनिया ने विज्ञान, समाजवाद और राजतंत्र जैसे तमाम प्रयोग करके देख लिए हैं। लेकिन आज भी शांति कहीं दिखाई नहीं देती। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया भारत के जीवन दृष्टिकोण की ओर देख रही है। उनके शब्दों में, "सनातन धर्म केवल एक पंथ नहीं, बल्कि वह दिशा है जो दुनिया को सही मार्ग दिखा सकती है।" भारत की एकता पर जोर देते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि सदियों से हमारे समाज में विविधता रही है, लेकिन यह हमें बांटती नहीं बल्कि जोड़ती है। उन्होंने बाहरी ताकतों से सावधान रहने की चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ शक्तियां भारत के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए हमारे बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में सामूहिक एकता ही हमारा सबसे बड़ा कवच है।

 Mohan Bhagwat Tripura Visit : सेवा कार्यों की सराहना और दक्षिण भारत का उदाहरण

मंदिरों को भारतीय सामाजिक जीवन का केंद्र बताते हुए उन्होंने वहां चलने वाले सेवा कार्यों की महत्ता समझाई। विशेष रूप से उन्होंने दक्षिण भारत के चार राज्यों का जिक्र किया, जहां सेवा भाव और सामाजिक सक्रियता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। डॉ. भागवत ने चिन्मय हरिहर विद्यालय द्वारा दी जा रही पूरी तरह निशुल्क शिक्षा की सराहना करते हुए कहा कि निस्वार्थ सेवा करने वालों को ही समाज युगों तक याद रखता है। ऋषि-मुनियों के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा नदियों, पहाड़ों और संपूर्ण प्रकृति को ईश्वर का स्वरूप माना है। यह दृष्टिकोण किसी एक दिन में नहीं बना, बल्कि हजारों वर्षों की निरंतर साधना का परिणाम है।  इस ऐतिहासिक अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और टिपरा मोथा के प्रमुख प्रद्योत देबबर्मा सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं। डॉ. भागवत का यह दो दिवसीय त्रिपुरा दौरा न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक एकजुटता के संदेश के कारण भी चर्चा में बना हुआ है।

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