नई दिल्ली : भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया विभाग (IB) ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। पाकिस्तान में बैठकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने वाला दाऊद इब्राहिम का सिंडिकेट अब अपनी रणनीति बदल रहा है। सीमाओं पर बढ़ती सुरक्षा और निगरानी के कारण, यह गिरोह अब पाकिस्तान या बांग्लादेश से नकली नोट मंगवाने के बजाय भारत के भीतर ही स्थानीय स्तर पर इनकी छपाई और प्रसार करने में जुट गया है।
पिछले कुछ महीनों में भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों ने तस्करों की कमर तोड़ दी है। खुफिया अधिकारियों के अनुसार, पहले नकली नोटों की एक बड़ी खेप सीमा पार से आती थी, लेकिन अब कड़ी चौकसी के कारण यह रास्ता लगभग बंद सा हो गया है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के मालदा जैसे इलाकों में, जो कभी नकली नोटों का केंद्र हुआ करते थे, अब जांच एजेंसियों की सक्रियता से वहां की उत्पादन क्षमता 50 फीसदी तक गिर गई है।
जब सीमा पार से तस्करी मुश्किल हुई, तो दाऊद गिरोह ने अपने भारतीय गुर्गों को स्थानीय स्तर पर छोटी-छोटी प्रिंटिंग यूनिट्स लगाने का निर्देश दिया है। जांच से पता चला है कि यह गिरोह अब गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों में अपना जाल फैला रहा है। एजेंसियों का कहना है कि सिंडिकेट अब "स्मॉल एंड फ्रीक्वेंट" (छोटा लेकिन बार-बार) के फॉर्मूले पर काम कर रहा है। यानी, एक ही जगह बड़े पैमाने पर छपाई करने के बजाय, अलग-अलग राज्यों में छोटी इकाइयां बनाई जा रही हैं ताकि पकड़े जाने का जोखिम कम हो और पकड़े जाने पर भी पूरा नेटवर्क ध्वस्त न हो।
नकली नोटों के प्रसार के लिए अब तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। हाल ही में अमृतसर में सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पुलिस ने 2.5 लाख रुपये के नकली नोट बरामद किए थे। माना जा रहा है कि यह ड्रोन के जरिए नकली करेंसी भेजने का एक 'ट्रायल रन' था। हालांकि सुरक्षा बल अक्सर ड्रग्स और हथियारों वाले ड्रोन मार गिराते हैं, लेकिन अब ड्रोन का उपयोग नकली नोटों की तस्करी के लिए होना एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
खुफिया विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को अस्थिर करना और नकली नोटों के जरिए होने वाली कमाई से आतंकी गतिविधियों को फंड करना है। सिंडिकेट की कोशिश है कि बाजार में लगातार नकली मुद्रा का प्रवाह बना रहे ताकि देश की वित्तीय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा सके। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और अन्य राज्य पुलिस बल अब इन छिटपुट प्रिंटिंग यूनिट्स को ट्रैक करने के लिए अपने सर्विलांस सिस्टम को और अधिक मजबूत कर रहे हैं। आने वाले दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में इस सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की उम्मीद है। भारत में नकली नोटों का खतरा अब केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक भी होता जा रहा है। ऐसे में नागरिकों को भी नोटों की पहचान के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है।
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