नई दिल्लीः भारत की सबसे पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थयात्राओं में से एक चारधाम यात्रा का 2026 सीजन अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर विधिवत रूप से शुरू हो गया है। छह महीने की शीतकालीन बंदी के बाद सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। जैसे ही वैदिक मंत्रोच्चार, ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तिमय वातावरण के बीच मंदिरों के द्वार खुले, पूरा क्षेत्र आस्था और भक्ति से सराबोर हो गया।
चारधाम यात्रा को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और मोक्षदायी माना जाता है। यह यात्रा हिमालय की ऊंची चोटियों में स्थित चार प्रमुख धामों—यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ—से होकर गुजरती है। मान्यता है कि इस यात्रा के दर्शन से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। परंपरा के अनुसार यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री धाम से होती है, उसके बाद गंगोत्री, फिर केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम के दर्शन किए जाते हैं।
2026 के लिए चारधाम यात्रा का पूरा कार्यक्रम पहले ही तय कर दिया गया है। यमुनोत्री धाम 19 अप्रैल से 11 नवंबर तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा। इसी तरह गंगोत्री धाम 19 अप्रैल से 10 नवंबर तक दर्शन के लिए उपलब्ध रहेगा। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खोले जाएंगे और यह 11 नवंबर तक खुले रहेंगे। वहीं बद्रीनाथ धाम 23 अप्रैल से 13 नवंबर तक भक्तों के लिए दर्शन हेतु खुला रहेगा।
इस वर्ष यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन पवित्र धामों की ओर रुख कर रहे हैं। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार इस बार यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में यात्रियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रशासन की ओर से यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। यात्रा मार्गों पर सफाई, पेयजल, पार्किंग और ठहरने की सुविधाओं को बेहतर किया गया है। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करते हुए मेडिकल टीमों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके।
इसके अलावा पुलिस बल और SDRF की टीमें लगातार निगरानी में रहेंगी। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम परिवर्तन और भूस्खलन जैसी संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विशेष आपदा प्रबंधन योजना भी तैयार की गई है। यात्रियों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर और कंट्रोल रूम को सक्रिय कर दिया गया है। भीड़ प्रबंधन के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण प्रक्रिया पहले से ही शुरू कर दी गई है, ताकि यात्रा को व्यवस्थित रखा जा सके और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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