'प्रभु श्रीराम का मंदिर लूटने वालों को छोड़ेंगे नहीं', अयोध्या में आरोपियों का हुक्का-पानी बंद, गजनवी से हुई तुलना!

खबर सार :-

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों का सामाजिक बहिष्कार शुरू! सांसद संजय सिंह ने बीजेपी पर साधा निशाना, जांच को सुप्रीम कोर्ट या सीबीआई को सौंपने की मांग की। जानिए पूरा मामला।
'प्रभु श्रीराम का मंदिर लूटने वालों को छोड़ेंगे नहीं', अयोध्या में आरोपियों का हुक्का-पानी बंद, गजनवी से हुई तुलना!

खबर विस्तार : -

लखनऊ/नई दिल्ली:  अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर निर्माण के नाम पर एकत्र की गई धनराशि में हुए बड़े घपले को लेकर अब सियासत के साथ-साथ सामाजिक गुस्सा भी चरम पर पहुंच गया है। आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने इस पूरे प्रकरण पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि दुनिया भर के सनातनियों की अटूट आस्था के साथ हुआ क्रूर मज़ाक है। इस तथाकथित राम मंदिर चंदा चोरी घोटाला (Ram Mandir Donation Scam) ने हर रामभक्त के दिल को गहरी ठेस पहुंचाई है।

अधिवक्ता संघ द्वारा चढ़ावा चोरी के आरोपियों का सामाजिक बहिष्कार शुरू

सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने अयोध्या (Ayodhya) से आ रही खबरों का हवाला देते हुए बताया कि वहां के स्थानीय अधिवक्ता संघ (Advocates Association) ने इस महाघोटाले के मुख्य आरोपियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वकीलों ने साफ कर दिया है कि इस राम मंदिर चंदा चोरी घोटाला (Ram Mandir Donation Scam) के किसी भी आरोपी का मुकदमा स्थानीय स्तर पर कोई भी अधिवक्ता नहीं लड़ेगा। इतना ही नहीं, इन लोगों को पवित्र रामनगरी (Ramnagari) छोड़ने के लिए महज तीन दिनों का कड़ा अल्टीमेटम (Ultimatum) भी थमा दिया गया है, जिससे साफ है कि आरोपियों का सामाजिक बहिष्कार (Social Boycott) जमीनी स्तर पर शुरू हो चुका है।

PMO द्वारा बनाई गई व्यवस्था की जांच CMO की SIT कैसे करेगी?

 सरकार की नीयत पर तीखे सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) इस पूरे मामले में केवल पर्दा डालने और लीपापोती करने में व्यस्त है। चूंकि इस कथित राम मंदिर चंदा चोरी घोटाला (Ram Mandir Donation Scam) के मुख्य किरदारों की नियुक्तियां सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के स्तर से जुड़ी हुई थीं, इसलिए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधीन काम करने वाली एसआईटी (SIT) कभी भी इस ऊंचे रसूखदार तंत्र की निष्पक्षता से जांच नहीं कर सकती। यही कारण है कि इस संवेदनशील राम मंदिर चंदा चोरी घोटाला (Ram Mandir Donation Scam) की कमान अब सीधे सीबीआई (CBI) या फिर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की निगरानी वाली विशेष टीम को सौंप दी जानी चाहिए।

2021 से शिकायत कर रहा हूँ, 13 भूमि घोटालों के दस्तावेज भी सौंपे

उन्होंने पुराने दस्तावेजों की याद दिलाते हुए कहा कि वे साल 2021 से ही इस भ्रष्टाचार (Corruption) के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने स्वयं पुलिस को शिकायत दी थी और जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े 13 पुख्ता घोटालों के कागजात जांच टीम को सौंपे थे, लेकिन सत्ता के दबाव में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि वर्तमान में कुछ बड़े पदों से जो इस्तीफे (Resignations) दिलवाए गए हैं, वह केवल जनता का ध्यान भटकाने का एक सुनियोजित नाटक है। असलियत में इस राम मंदिर चंदा चोरी घोटाला (Ram Mandir Donation Scam) के मास्टरमाइंड अभी भी पर्दे के पीछे से सब कुछ नियंत्रित कर रहे हैं।

महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर लूटा था, भाजपा ने प्रभु श्रीराम का मंदिर लूटा

इतिहास का संदर्भ देते हुए संजय सिंह (Sanjay Singh) ने एक बेहद तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सदियों पहले विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी (Mahmud Ghaznavi) ने सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) को लूटा था, परंतु आज इस चंदाचोर गुट ने प्रभु श्रीराम के मंदिर के धन को ही साफ कर दिया। प्रतापगढ़ के एक बुजुर्ग द्वारा अपनी जीवनभर की पूंजी बेचकर दान किए गए एक करोड़ रुपये जैसी अनगिनत श्रद्धाओं का अपमान हुआ है। देशवासियों को अब इस राम मंदिर चंदा चोरी घोटाला (Ram Mandir Donation Scam) के जिम्मेदार भ्रष्टाचारियों का पूर्ण रूप से लोकतांत्रिक और सामाजिक स्तर पर बहिष्कार करना चाहिए, ताकि धर्म के नाम पर दुकान चलाने वालों को कड़ा सबक मिल सके। यह लड़ाई आस्था के शुद्धिकरण की है।

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