4 साल की मासूम का रेप कर शव गोबर में दबाया, 65 साल के जल्लाद भीमराव कांबले को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा, कहा- 'फांसी भी कम है इसके लिए!'

खबर सार :-

Nasarpur Rape Case : पुणे के नसरपुर में 4 साल की मासूम बच्ची का रेप और मर्डर करने वाले 65 वर्षीय भीमराव कांबले को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। जानिए इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले की पूरी सच्चाई।
4 साल की मासूम का रेप कर शव गोबर में दबाया, 65 साल के जल्लाद भीमराव कांबले को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा, कहा- 'फांसी भी कम है इसके लिए!'

खबर विस्तार : -

पुणे : जिले से एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिसने न सिर्फ न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा मजबूत किया है, बल्कि समाज में छिपे दरिंदों को कड़ा संदेश भी दिया है। पुणे के नसरपुर (Nasrapur) इलाके में महज़ चार साल की मासूम बच्ची के साथ हैवानियत की सारी हदें पार करने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग भीमराव कांबले को अदालत ने फांसी की सजा (Death Penalty) सुनाई है। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले की सुनवाई स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट (Special Fast Track Court) में चल रही थी, जहाँ सोमवार को जज एसआर सालुंके ने दोषी को मौत की सजा सुनाते हुए बेहद तल्ख टिप्पणियां कीं। मामला मई के प्रथम सप्ताह की घटना का है, जब बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी। आरोप है कि बस्ती के ही रहने वाले भीमराव कांबले ने बच्ची को उठाकर गौशाला ले जाया, जहां उसकी दरिंदगी के बाद हत्या कर दी गई और शव को गोबर के ढेर में छिपा दिया गया। आसपास के CCTV फुटेज और फोरेंसिक जांच ने आरोपियों की पहचान और उनके कृत्यों की पुष्टि करने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने तेज़ी से कार्रवाई कर आरोपी को हिरासत में लिया और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में तेज रफ्तार से पूरी कराई गई।

अदालत ने फैसला सुनाते हुए साफ कहा कि इस जघन्य और घिनौनी वारदात को देखने के बाद उम्रकैद की सजा किसी भी सूरत में काफी नहीं कही जा सकती। कोर्ट ने यहाँ तक टिप्पणी की कि इस हैवानियत के लिए फांसी की सजा भी छोटी है, लेकिन कानून के दायरे में कोर्ट के पास दोषी को देने के लिए इससे बड़ी कोई सजा मौजूद नहीं है। जब अदालत यह ऐतिहासिक फैसला सुना रही थी, तब पीड़ित बच्ची के रोते-बिलखते परिजन भी कोर्ट रूम में मौजूद थे, जिनकी आंखों में अपनी लाडली को खोने का गम और इंसाफ मिलने का सुकून साफ देखा जा सकता था।

Nasarpur Rape Case :  महज़ एक महीने के भीतर आया ऐतिहासिक फैसला

इस पूरे मामले ने भारतीय न्याय प्रणाली (Judiciary) में तेजी की एक नई मिसाल पेश की है। यह मामला अब तक की सबसे तेज कानूनी कार्यवाही में से एक बनकर उभरा है, जिसमें घटना घटने के महज़ एक महीने के भीतर ही पुलिस तफ्तीश से लेकर आरोपी को पकड़ने और फिर कोर्ट द्वारा उसे सूली पर चढ़ाने तक का हुक्म सुना दिया गया। देश में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को देखते हुए इस तरह के त्वरित न्याय (Speedy Justice) की मांग लंबे समय से की जा रही थी।

मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो यह खौफनाक वारदात इसी साल एक मई को पुणे के भोर तालुका के अंतर्गत आने वाले नसरपुर में अंजाम दी गई थी। कोर्ट ने त्वरित कार्यवाही करते हुए बीते 25 जून को ही आरोपी भीमराव कांबले को आधिकारिक तौर पर दोषी करार दे दिया था और सजा के ऐलान के लिए 29 जून की तारीख तय की थी। वादे के मुताबिक, आज कोर्ट ने अपना सख्त रुख अख्तियार करते हुए अपराधी के लिए फांसी का फंदा मुकर्रर कर दिया।

Nasarpur Rape Case : पत्थर से कुचला सिर, गोबर के ढेर में छिपाया शव

यह पूरी घटना इतनी वीभत्स थी कि सुनने वालों की रूह कांप जाए। एक मई की दोपहर चार साल की मासूम बच्ची अपने घर के बाहर बेफिक्र होकर खेल रही थी। उसी दौरान इलाके का ही रहने वाला 65 साल का भीमराव कांबले वहां पहुंचा। बच्ची को अकेला पाकर वह उसे बहला-फुसलाकर पास की एक गौशाला (Cowshed) में ले गया। वहां उसने उस मासूम के साथ दुष्कर्म (Rape) जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

हैवानियत यहीं नहीं रुकी, जब बच्ची दर्द से चीखने लगी तो पकड़े जाने के डर से कांबले ने पास पड़े एक भारी पत्थर से उसका सिर बेरहमी से कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद सबूत मिटाने की नीयत से उसने मासूम के शव को गौशाला में मौजूद गोबर के ढेर के नीचे दबा दिया और वहां से फरार हो गया। जब काफी देर तक बच्ची घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद गौशाला से बच्ची का लहूलुहान शव बरामद हुआ। पुलिस ने जब आस-पास के सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) खंगाले, तो उसमें भीमराव कांबले बच्ची को ले जाता हुआ साफ कैद मिला, जिसके बाद उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।

Nasarpur Rape Case : जज के सामने बोला कोर्ट में- 'मैंने कुछ गलत नहीं किया'

इस केस का सबसे चौंकाने वाला पहलू दोषी का रवैया रहा। स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (Special Public Prosecutor) एडवोकेट मिलिंद पवार ने मीडिया को बताया कि पूरी अदालती कार्यवाही और पूछताछ के दौरान भीमराव कांबले के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। उसे अपनी इस दरिंदगी पर रत्ती भर भी पछतावा (Remorse) नहीं था। 25 जून को जब अदालत ने उसे दोषी ठहराया, तब जज ने उसे कटघरे में बुलाकर पूछा था कि वह अपनी इस करतूत को याद करे और खुद बताए कि उसे क्या सजा मिलनी चाहिए। इस पर कांबले ने बेहद बेशर्मी से अदालत के सामने पूरी वारदात कबूल करते हुए कहा कि उसके नजरिये से उसने कुछ भी गलत नहीं किया था। उसकी इस बात को सुनकर कोर्ट रूम में सन्नाटा पसर गया और जज ने उसे बीच में ही टोकते हुए बोलने से रोक दिया। सरकारी और पीड़ित पक्ष के वकीलों ने शुरू से ही इस मामले को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) मानते हुए फांसी की मांग की थी, जिसे आखिरकार अदालत ने स्वीकार कर लिया।

नसरपुर केस (Nasarpur Rape Case)  ने तत्काल और कड़ा न्याय सुनिश्चित किया, पर इससे यह सवाल भी उठते हैं कि क्या न्याय की गति और निर्णायक कठोरता पर्याप्त है जब तक संरचनात्मक निवारक उपाय और समुदाय-आधारित संरक्षण प्रणालियाँ मजबूत न हों। त्वरित सजा क्षणिक समाधान प्रदान करती है, पर दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए बहुआयामी नीतिगत हस्तक्षेप अनिवार्य हैं। समाज, न्यायपालिका और प्रशासन को मिलकर बच्चों की सुरक्षा के व्यापक तंत्र को लागू करना होगा ताकि इस तरह की भयावह घटनाएँ फिर न हों।

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