Indian Stock Market Surge: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी ला दी। अमेरिका और ईरान के बीच रिश्तों में नरमी की खबरों ने निवेशकों की धारणा को मजबूत किया, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 566.32 अंकों की छलांग के साथ 78,677.56 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 153.90 अंकों की बढ़त के साथ 24,385.20 पर कारोबार करता नजर आया।
इस तेजी का सबसे बड़ा फायदा रियल्टी और मेटल सेक्टर को हुआ, जहां निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल इंडेक्स टॉप गेनर्स में शामिल रहे, जिससे बाजार की मजबूती और स्पष्ट हुई। इसके अलावा, डिफेंस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, पीएसयू बैंक, सर्विसेज और प्राइवेट बैंक जैसे सेक्टरों में भी सकारात्मक रुख देखा गया। लगभग सभी सेक्टर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, जो बाजार में व्यापक तेजी का संकेत है।
लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 515.80 अंकों की बढ़त के साथ 59,293.55 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 187.95 अंकों की तेजी के साथ 17,344.35 पर कारोबार करता दिखा। यह संकेत देता है कि बाजार में केवल चुनिंदा शेयर ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। सेंसेक्स पैक में कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया। बजाज फाइनेंस, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एलएंडटी, टीसीएस, टाटा स्टील, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, आईटीसी और भारती एयरटेल जैसे शेयरों में तेजी रही। वहीं, केवल सन फार्मा और टाइटन के शेयरों में हल्की गिरावट देखने को मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरों के कारण आई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति हुई है, हालांकि कुछ मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं। इसके अलावा, अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा इजरायल और लेबनान के नेताओं के बीच संभावित वार्ता का संकेत भी वैश्विक शांति की उम्मीदों को मजबूत करता है। वैश्विक संकेतों की बात करें तो एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। टोक्यो, सोल, हांगकांग और शंघाई के बाजार हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। इससे भारतीय बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला। हालांकि, अमेरिकी बाजारों में मिश्रित रुख रहा-डाओ जोन्स में हल्की गिरावट आई, जबकि नैस्डैक ने मजबूत बढ़त दर्ज की।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों को राहत मिलेगी। इससे महंगाई पर भी नियंत्रण संभव है और कॉरपोरेट मुनाफे में सुधार हो सकता है। यही कारण है कि निवेशकों का झुकाव इक्विटी बाजार की ओर बढ़ रहा है। आगे की दिशा में बाजार का रुख वैश्विक घटनाक्रम, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता बनी रहती है, तो भारतीय बाजार में यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है।
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