Natural Gas बाजार में वापसी की रफ्तार तेज, कीमतों में सुधार के पीछे सप्लाई-डिमांड का नया संतुलन

खबर सार :-
प्राकृतिक गैस बाजार में हालिया सुधार मुख्य रूप से घटते भंडार, बढ़ते एलएनजी निर्यात और बिजली क्षेत्र की मजबूत मांग का परिणाम है। हेनरी हब कीमतों में आई रिकवरी से संकेत मिलता है कि बाजार स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। आने वाले समय में वैश्विक मांग, उत्पादन विस्तार और मौसमी कारक इस कमोडिटी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
Natural Gas बाजार में वापसी की रफ्तार तेज, कीमतों में सुधार के पीछे सप्लाई-डिमांड का नया संतुलन
खबर विस्तार : -

Motilal Oswal report: वैश्विक ऊर्जा बाजार में लंबे समय तक दबाव झेलने के बाद अब प्राकृतिक गैस (नेचुरल गैस) की कीमतों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। वर्ष 2026 की शुरुआत में भारी गिरावट के बाद यह कमोडिटी अब धीरे-धीरे मजबूती की ओर लौट रही है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह सुधार मुख्य रूप से गैस भंडार में गिरावट, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) निर्यात में वृद्धि और मौसमी बिजली मांग में तेज उछाल के कारण संभव हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बदलने लगा है, जिसका सीधा असर प्राकृतिक गैस की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

हेनरी हब कीमतों में उतार-चढ़ाव के बाद रिकवरी

रिपोर्ट के मुताबिक, प्राकृतिक गैस का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मूल्य सूचकांक हेनरी हब (Henry Hub) अप्रैल में भारी गिरावट के साथ 7.72 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBTU) से टूटकर 2.77 डॉलर प्रति MMBTU तक पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद बाजार में रिकवरी देखने को मिली और कीमतें फिर से 3 डॉलर प्रति MMBTU के ऊपर स्थिर होने लगीं। यह सुधार निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों दोनों के लिए राहत का संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इतनी तेज गिरावट के बाद आई यह रिकवरी संकेत देती है कि बाजार में बॉटम आउट फेज पूरा हो चुका है और अब धीरे-धीरे स्थिरता लौट रही है।

कम स्टोरेज इंजेक्शन और घटता अतिरिक्त भंडार बना सहारा

रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के महीनों में प्राकृतिक गैस के स्टोरेज इंजेक्शन अपेक्षा से कम रहे हैं। इसका मतलब है कि बाजार में नई गैस का भंडारण धीमी गति से हुआ है। इसके चलते पहले जो अतिरिक्त आपूर्ति (ओवरहैंग) बनी हुई थी, वह धीरे-धीरे कम हो गई है। वर्ष-दर-वर्ष आधार पर देखा जाए तो अप्रैल के मुकाबले अतिरिक्त भंडार में काफी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार तीन सप्ताह तक भंडारण में कमजोर वृद्धि ने भी बाजार को यह संकेत दिया है कि सप्लाई अब उतनी अधिक नहीं रही जितनी पहले थी।

बिजली क्षेत्र की मांग ने बढ़ाया दबाव और समर्थन दोनों

गर्म मौसम के कारण बिजली की मांग में तेजी आई है, जिससे पावर सेक्टर में प्राकृतिक गैस की खपत बढ़ गई है। कूलिंग जरूरतों के चलते बिजली कंपनियां अधिक गैस आधारित उत्पादन पर निर्भर हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मौसमी मांग आने वाले समय में भी कीमतों को समर्थन देती रहेगी, खासकर तब जब कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में अस्थिरता देखने को मिलती है। इस बढ़ी हुई मांग ने बाजार में संतुलन बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

Motilal Oswal report-Natural gas price-LNG exports

एलएनजी निर्यात क्षमता में विस्तार बना बड़ा फैक्टर

अमेरिका की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यात क्षमता में लगातार विस्तार ने भी वैश्विक कीमतों को सहारा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में एलएनजी निर्यात में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। नए एलएनजी संयंत्रों के संचालन में आने और अतिरिक्त लिक्विफिकेशन ट्रेनों के शुरू होने से निर्यात क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे घरेलू उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय मांग के बीच बेहतर संतुलन बनने की संभावना है। यूरोप और एशिया में ऊंचे मूल्य प्रीमियम के कारण अमेरिकी एलएनजी कार्गो की मांग भी बढ़ी है, जिससे वैश्विक व्यापार प्रवाह मजबूत हुआ है।

यूरोप और एशिया की मांग से वैश्विक बाजार मजबूत

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूरोप और एशिया में गैस की मांग स्थिर से मजबूत बनी हुई है। दोनों क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा और स्टोरेज प्रबंधन को लेकर सतर्कता बढ़ी है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी एलएनजी के लिए आकर्षण बना हुआ है। साथ ही, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रहे व्यवधानों ने भी एलएनजी की मांग को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ाया है।

नई मांग का स्रोत बन रहे डेटा सेंटर

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी रिसर्च प्रमुख नवनीत दमानी के अनुसार, डेटा सेंटरों की बढ़ती ऊर्जा जरूरतें भी प्राकृतिक गैस की मांग का नया और महत्वपूर्ण स्रोत बन रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ऊर्जा खपत का पैटर्न बदल रहा है, जिसमें गैस आधारित बिजली उत्पादन की भूमिका बढ़ रही है। इन सभी कारकों को देखते हुए प्राकृतिक गैस के लिए मध्यम अवधि का दृष्टिकोण पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक नजर आ रहा है।

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