मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असरः भारत में थमे ईंधन के दाम, पड़ोसी देशों में 42% तक महंगाई की मार

खबर सार :-
मध्य पूर्व के तनाव ने वैश्विक ईंधन बाजार को झकझोर दिया है, लेकिन भारत ने संतुलित नीतियों के जरिए कीमतों को स्थिर रखा है। इसके विपरीत, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों में भारी महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा कि भारत यह स्थिरता कितने समय तक बनाए रख पाता है।

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असरः भारत में थमे ईंधन के दाम, पड़ोसी देशों में 42% तक महंगाई की मार
खबर विस्तार : -

India fuel price stability vs Pakistan: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि, इस अस्थिर माहौल के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जो आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। इसके उलट, पड़ोसी देशों-खासतौर पर पाकिस्तान और नेपाल में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।

ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने में जुटी सरकार

भारत में जहां ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने सक्रिय कदम उठाए हैं, वहीं पाकिस्तान में स्थिति काफी चिंताजनक हो चुकी है। आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 266.17 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर थी, जो 16 अप्रैल तक बढ़कर 366.58 रुपये प्रति लीटर हो गई। इसी तरह, डीजल की कीमत 280.86 रुपये से बढ़कर 385.54 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। यह वृद्धि पेट्रोल में लगभग 37.74 प्रतिशत और डीजल में 37.27 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाती है।

नेपाल की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। बीते एक महीने में चार बार ईंधन कीमतों में इजाफा हुआ है, जिससे वहां पेट्रोल और डीजल दक्षिण एशिया में सबसे महंगे हो गए हैं। 28 फरवरी को जहां पेट्रोल की कीमत 154 नेपाली रुपये प्रति लीटर थी, वह अब बढ़कर 219 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं, डीजल 156 रुपये से बढ़कर 207 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। यह वृद्धि पेट्रोल में 42.20 प्रतिशत और डीजल में 32.59 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी को दर्शाती है।

भारत में ईंधन की कीमतों में स्थिरता

इसके मुकाबले भारत में ईंधन कीमतों में स्थिरता देखने को मिल रही है। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। यह स्थिरता ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सरकार द्वारा उठाए गए रणनीतिक कदमों के कारण यह संभव हो पाया है। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हो रही उथल-पुथल का भार सीधे उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय खुद वहन करने का निर्णय लिया है। इससे न केवल महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिली है, बल्कि आम जनता को भी राहत मिली है।

तेल की बढ़ती कीमतों से पूरी दुनिया परेशान

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी इस विषय पर बयान देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर देश के नागरिकों पर न पड़े। उन्होंने बताया कि बीते एक महीने में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो यह बढ़ोतरी केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ईंधन कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। वहीं, उत्तरी अमेरिका में लगभग 30 प्रतिशत, यूरोप में 20 प्रतिशत और अफ्रीकी देशों में 50 प्रतिशत तक का इजाफा देखा गया है। ऊर्जा बाजार में इस तरह की अस्थिरता भविष्य के लिए भी चिंता का विषय है। यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो भारत के लिए भी कीमतों को स्थिर बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि फिलहाल सरकार की नीतियां आम लोगों को राहत देने में सफल होती नजर आ रही हैं।

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