Gold price biggest fall : वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोना, जिसे आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, इस बार निवेशकों को चौंकाता हुआ नजर आया। अमेरिका-ईरान युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच मार्च महीने में सोने की कीमतों में 17 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान कीमती धातु करीब 14.5 प्रतिशत तक लुढ़क गई, जिससे बाजार में हलचल मच गई है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो मौजूदा समय में कॉमेक्स पर सोना करीब 4,600 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि इसी महीने की शुरुआत में इसकी कीमत लगभग 5,400 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी। यानी महज कुछ ही हफ्तों में निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। इतिहास पर गौर करें तो इससे पहले अक्टूबर 2008 में सोने में करीब 16.8 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी। उस समय वैश्विक वित्तीय संकट का दौर था। अब 17 साल बाद फिर से इतनी बड़ी गिरावट ने बाजार विशेषज्ञों और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे बड़ा कारण मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) को माना जा रहा है। लंबे समय तक तेजी के बाद निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली की, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में तेजी भी एक बड़ा कारण रही। जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो सोना आमतौर पर कमजोर पड़ता है क्योंकि यह डॉलर में महंगा हो जाता है। इसी के साथ बॉन्ड यील्ड में वृद्धि ने भी निवेशकों को सोने से दूर कर दिया। बढ़ती यील्ड निवेशकों को सुरक्षित और बेहतर रिटर्न का विकल्प देती है, जिससे सोने की मांग घटती है। कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल जैसी अन्य वस्तुओं में आई तेजी ने भी सोने पर दबाव बनाया। निवेशकों ने अपना रुख बदलते हुए अन्य एसेट क्लास में निवेश बढ़ाया, जिससे सोना पीछे छूट गया।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पिछले चार वर्षों में सोने के कारोबार के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है। यूक्रेन युद्ध से पहले तक सोने का संबंध बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर के साथ उल्टा रहता था। यानी जब डॉलर और यील्ड गिरते थे, तब सोना बढ़ता था और इसके उलट स्थिति में सोना गिरता था। हालांकि, यूक्रेन युद्ध के बाद यह समीकरण बदल गया था। खासकर 2025 और 2026 की शुरुआत में सोने में तेज उछाल देखा गया, जिसने पारंपरिक पैटर्न को तोड़ दिया। उस समय भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के चलते सोने को जबरदस्त समर्थन मिला था। अब अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद बाजार फिर से अपने पुराने ढर्रे पर लौटता दिखाई दे रहा है। बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों में मजबूती आई है, और सोने ने इनके प्रति अपनी पारंपरिक प्रतिक्रिया देते हुए गिरावट दर्ज की है।
हालांकि, इस गिरावट के बावजूद लंबे समय का परिदृश्य अभी भी सोने के पक्ष में नजर आता है। बीते एक साल में सोने की कीमतों में 45 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, जो इसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। वहीं पिछले छह महीनों में भी करीब 18 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि अल्पकालिक दबाव के बावजूद सोना अभी भी लंबी अवधि के निवेश के लिए आकर्षक बना हुआ है। भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और मुद्रास्फीति जैसे कारक भविष्य में फिर से सोने को मजबूती दे सकते हैं।
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