डीआरआई का तस्करों पर डिजिटल स्ट्राइक: 120 करोड़ की 3 लाख ई-सिगरेट जब्त, कई राज्यों में छापेमारी

खबर सार :-
डीआरआई की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि प्रतिबंधित उत्पादों की तस्करी के खिलाफ एजेंसियां अब बेहद आक्रामक रुख अपना रही हैं। ई-सिगरेट जैसे निकोटीन उत्पादों पर बढ़ती सख्ती से न केवल अवैध कारोबार पर रोक लगेगी, बल्कि युवाओं को नशे की लत से बचाने में भी मदद मिलेगी। आने वाले समय में ऐसे नेटवर्कों पर और बड़े अभियान देखने को मिल सकते हैं।

डीआरआई का तस्करों पर डिजिटल स्ट्राइक: 120 करोड़ की 3 लाख ई-सिगरेट जब्त, कई राज्यों में छापेमारी
खबर विस्तार : -

DRI action e-cigarette smuggling: देश में प्रतिबंधित ई-सिगरेट और वेप्स की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क पर राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 120 करोड़ रुपए मूल्य की 3 लाख ई-सिगरेट/वेप्स जब्त की हैं। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि डीआरआई ने महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के विभिन्न बंदरगाहों, हवाई अड्डों और आईसीडी केंद्रों पर अभियान चलाकर इस संगठित तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया।

कई राज्यों में फैला था तस्करी का जाल

डीआरआई के अनुसार, यह नेटवर्क लंबे समय से प्रतिबंधित निकोटीन उत्पादों की अवैध सप्लाई में सक्रिय था। जांच एजेंसियों को इनपुट मिला था कि विदेशी खेपों में गलत घोषणा कर प्रतिबंधित वेप्स भारत लाए जा रहे हैं। इसके बाद डीआरआई ने कई संदिग्ध कंटेनरों और आयात खेपों पर निगरानी शुरू की। अधिकारियों ने पाया कि तस्कर चीन से आने वाले माल को “फर्नीचर”, “मेटल चेयर पार्ट्स” और अन्य सामान्य वस्तुओं के नाम पर घोषित कर सीमा शुल्क जांच से बचने की कोशिश कर रहे थे। इसी रणनीति के जरिए बड़ी मात्रा में ई-सिगरेट देश में पहुंचाई जा रही थीं।

3 लाख से ज्यादा वेप्स बरामद

डीआरआई की विस्तृत जांच और तलाशी अभियान के दौरान विभिन्न ब्रांड, फ्लेवर और मॉडलों की लगभग 3,00,000 इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और वेप्स बरामद किए गए। अधिकारियों के मुताबिक इनकी बाजार कीमत 120 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। यह हाल के वर्षों में ई-सिगरेट तस्करी के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

DRI action-e-cigarette smuggling-vape seizure

युवाओं को निशाना बना रहे थे तस्कर

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क बड़े शहरों में युवाओं को टारगेट कर रहा था। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और गुप्त सप्लाई चैनलों के जरिए इन उत्पादों की बिक्री की जा रही थी। कई वेप्स आकर्षक फ्लेवर और डिजाइन में थे, जिससे युवाओं और किशोरों को लुभाने की कोशिश की जा रही थी।

भारत में ई-सिगरेट पूरी तरह प्रतिबंधित

भारत सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2019 में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम लागू किया था। इस कानून के तहत ई-सिगरेट और सभी इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन पर पूर्ण प्रतिबंध है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ई-सिगरेट युवाओं में निकोटीन की लत बढ़ाने का बड़ा कारण बन रही है। इसी वजह से सरकार लगातार इनके अवैध कारोबार पर सख्ती बरत रही है।

‘ऑपरेशन गोल्डन ड्रॉप’ में भी मिली थी बड़ी सफलता

डीआरआई ने हाल ही में मुंबई में “ऑपरेशन गोल्डन ड्रॉप” के तहत सोने की तस्करी करने वाले एक संगठित गिरोह का भी भंडाफोड़ किया था। छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के जरिए संचालित इस नेटवर्क से करीब 4.8 करोड़ रुपए मूल्य का तीन किलोग्राम विदेशी सोना बरामद किया गया था। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया गया।

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